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आमिर खान को बॉलीवुड का मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहा जाता है, और कहा भी क्यों न जाए फिल्म में अपने किरदार में ढलने के लिए आमिर क्या कुछ नहीं कर जाते। कॉलेज बॉय का लुक हो या फिर 60 साल के बुजुर्ग का किरदार, आमिर खान पर्दे पर अपने किरदार को जीवंत कर देने का गुण रखते हैं। यही नहीं इसके अलावा आमिर खान की एक खासियत जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती है वो है फिल्मों की संख्या की बजाये फिल्मों की गुणवत्ता को ज्यादा महत्व देना। शायद यही वजह है कि फैन्स आमिर की फिल्मों पर आंख मूंदकर विश्वास कर लेते हैं, ये विश्वास कभी-कभी ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ जैसी फिल्मों की तरह फैन्स को मायूस भी कर देता है।
आमिर खान आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं, आमिर का जन्म 14 मार्च 1965 को मुंबई में हुआ था। आज आमिर के जन्मदिन के मौके पर चलिए जानते हैं आमिर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें-
पढ़ाई में रद्दड़ थे मिस्टर परफेक्शनिस्ट
आमिर खान भले ही बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट हो, लेकिन अगर पढ़ाई की बात करें तो वह अपने स्कूल के टाइम में सबसे रद्दड़ स्टूडेंट्स में से एक थे। कह सकते हैं कि आमिर बहुत ही खराब स्टूडेंट थे, जिनकी अटेंडेंस शॉर्ट रहती थी। आमिर को पढ़ाई में कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि आमिर खान ने अपनी पढ़ाई केवल 12 तक ही की है।
एक्टर नहीं बल्कि टेनिस प्लेयर बनना चाहते थे आमिर-
अगर आपको लग रहा है कि आमिर खान पढ़ाई-लिखाई में इसलिए कमजोर थे, क्योंकि उनकी दिलचस्पी फिल्मों में थी तो आप गलत हैं। दरअसल, आमिर खान की बचपन से दिलचस्पी टेनिस में थी। आमिर खान बड़े होकर टेनिस प्लेयर बनना चाहते थे। आमिर ने स्टेट लेवक तक टेनिस खेला था।
फिल्मी दुनिया से ताल्लुक रखते हैं आमिर
आमिर के पिता ताहिर हुसैन फिल्मी दुनिया से वास्ता रखते थे, वह फिल्म प्रोड्यूसर थे। वहीं, केवल पिता ही नहीं बल्कि आमिर के चाचा नासिर हुसैन भी फिल्म निर्माता के साथ-साथ फिल्म निर्देशक भी थे।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन के वंशज हैं आमिर-
आमिर खान मौलाना अबुल कलाम आजाद के वंशज है, जिनकी जड़े अफगानिस्तान के हेरात शहर में देखे जा सकते हैं। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन के भी वंशज हैं और भारत की अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ नजमा हेपतुल्ला के दूसरे भतीजे भी हैं।
12वीं पास करने के बाद पढ़ाई को कहा अलविदा-
आमिर खान के पिता ताहिर खान आमिर को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाना चाहते थे, लेकिन आमिर की दिलचस्पी पढ़ाई में नहीं थी। हाई स्कूल पास करने के बाद आमिर ने थिएटर को अपनी जिंदगी का नया रास्ता बना लिया। इसके बाद आमिर ने खान बॉलीवुड फिल्मों में काम करने लगे, इसी के साथ उन्होंने पढ़ाई को काफी पीछे छोड़ दिया और पढ़ाई की ओर कभी मुड़कर नहीं देखा।
आमिर की पहली फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ नहीं बल्कि ‘होली’ थी
आमिर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में नासिर हुसैन द्वारा निर्मित फिल्म यादों की बारात (1973) और मदहोश (1974) से की। 11 साल बाद, उन्हें एडल्ट अभिनय डेब्यू का मौका मिला जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, वह थी केतन मेहता की होली (1984)। लगभग 4 साल तक मुंबई में स्ट्रगल करने के बाद 1988 में अपने चाचा नासिर हुसैन के बैनर तले बनी फिल्म 'कयामत से कयामत तक' में काम किया, और यह फिल्म उनके करियर की पहली सफल फिल्म बनी जिसमें आमिर ने बतौर अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाई।
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