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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने 17 मार्च को हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया। बता दें कि वह पिछले काफी समय से पैंक्रियाटिक नामक कैंसर से जूझ रहे थे। लेकिन अंत में वह इससे हार गए। यह बीमारी इस वजह से भी ज्यादा खतरनाक इसलिए है क्योंकि शुरुआती दिनों में इसके लक्षण की पहचान नहीं हो पाती। ज्यादातर मामले ऐसे देखे गए हैं जिनमें प्रभावित सेल्स या तो बड़ा आका ले चुके हैं या फिर पैंक्रियाज के बाहर तक फैल चुके होते हैं। लेकिन एडवांस स्टेज पर पैन्क्रियाटिक कैंसर का अगर पता चल जाए और इसका इलाज शुरू भी कर दिया जाए तो भी मरीज के पूरी तरह से ठीक होने के चांसेस न के बराबर ही होते हैं।
जानिए क्या होता है पैंक्रियाटिक कैंसर:-
पैंक्रियाटिक कैंसर में पैंक्रियास (अग्नाश्य) के टिशू में कैंसर की सेल्स बन जाती है। पैंक्रियाज एक ग्रंथि है जो पेट के पाचन तंत्र का हिस्सा है। यह पेट की ऊपर भाग की तरफ रीढ़ की हड्डी के बिल्कुल सामने होती है। यह ब्लड शुगर को रेग्युलेट करने वाले डाइजेस्टिव जूस और हार्मोंस बनाती है।
2 तरह के होते हैं पैंक्रियाटिक कैंसर:-
पैंक्रियाज कैंसर भी 2 प्रकार को होते हैं- एक्सोक्राइन पैंक्रियाज सेल्स जो डाइजेस्टिव सेल्स बनाती है। यह ग्लैंड के अंदर होता है। जबकि एंडोक्राइन पैनक्रियाज सेल्स, शरीर के उस हिस्से में होता है जिससे हार्मोंस बनते हैं।
पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण:-
पीलिया होना
भूख कम लगना
पेट के ऊपरी हिस्से और पीठ में दर्द होना
अचानक वजन कम होना
बार-बार बुखार आना
बेचैनी और उल्टी आना
हाई ब्लड प्रेशर
त्वचा में ड्राइनेस बढ़ना
इन कारणों से हो सकता है ये पैंक्रियाटिक कैंसर:-
ज्यादा वजन
लंबे वक्त से डायबिटीज रहना
स्मोकिंग करना
अनुवांशिक बीमारी होना
ज्यादा देर तक बैठे रहना
इलाज:-
किमो थेरेपी:- इस थेरेपी के बारें में ज्यादातर लोग जानते होंगे। पैंक्रियाटिक कैंसर में कीमो थेरेपी या फिर रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।
टोटल पैंक्रियाटेक्टमी:- इस थेरेपी का कम ही इस्तेमाल होता है। क्योंकि इसमें पैंक्रियाज के साथ स्पलीन यानी ऐब्डमन का ऊपरी भाग भी निकाल दिया जाता है।
डिसटल पैंक्रियाटेक्टमी:- ऐसे में पैंक्रियाज के एक लंबे हिस्से को ही हटा दिया जाता है, जिसे टेल भी कहते हैं।
विपल प्रसीजर:- इस इलाज के दौरान स्मॉल इंटेस्टाइन और गॉल ब्लैडर के छोटे हिस्से को निकाला जाता है।
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