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चुनाव की तारीख का ऐलान होते ही सभी राजनीतिक पार्टियां भी पूरे जोश में आकर गई हैं और अपनी जीत के लिए खूब जोर-शोर के साथ प्रचार कर रही है। हर 5 साल के बाद ये लोकतंत्र चुनाव किए जाते और एक बार फिर से आम जनता के बीच उम्मीदें दिखाई देने लगती हैं। यह एक ऐसा मौका था जब कोई भी नागरिक अपनी मर्जी के मुताबिक अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट दे सकता है। लेकिन वोट चाहे किसी भी सरकार को दिया जाए, इनमें जो एक कॉमन चीज खासतौर पर देखने को मिली है, वह है उंगली पर लगने वाली स्याही। कम ही लोग ऐसे होने होंगे जो इस स्याही को लगाने की वजह जानते होंगे। तो चलिए आज हम जानते हैं कि आखिर क्यों लगाई जाती है ये स्याही।
क्यों लगाई जाने लगाई स्याही
देश में सबसे पहले चुनाव 1951-52 में हुए थे। उस समय ऐसी कोई भी निशानी नहीं लगाई जाती थी। लेकिन इस दौरान दो बार वोट डालने और दूसरे वोटरों की जगह किसी दूसरे शख्स के वोट डालने जैसी कई शिकायतें चुनाव आयोग के पास आईं। इसी को रोकने के लिए बहुत से तरीके सोचे गए, जिसमें से सबसे बेहतर अमिट स्याही के इस्तेमाल को ही माना गया।
बनवाई गई अनोखी स्याही
चुनाव आयोग ने इस स्याही को बनाने के लिए नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ऑफ इंडिया (NPL) की मदद ली। उन्होंने एक ऐसी स्याही बनाने की आदेश दिया जो पानी तो दूर किसी कैमिकल से भी न हटाई जा सके। इसके बाद NPL ने मैसूर पेंट एंड वार्निश कंपनी को इसी तरह की कोई स्याही बनाने का ऑर्डर दिया।
कब किया गया स्याही का इस्तेमाल
वर्ष 1962 में एक बार फिर से चुनाव हुए इस दौरान पहली बार इस अमिट स्याही का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद से ही इसे आज तक होने वाले सभी चुनावों में इस्तेमाल किया जाता है। इस स्याही को उंगली पर लगाने का मतलब होता है कि वह शख्स अपना वोट दे चुका है। खबरों के मुताबिक कहा जाता है कि, यह स्याही 15 दिनों तक नहीं मिटती।
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