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पिछले लम्बे समय से दुनियाभर के बच्चों और युवाओं के बीच ‘PUBG’ गेम का क्रेज बढ़ता जा रहा है या फिर हम कह सकते हैं कि आज के समय में युवाओं और बच्चों की पहली पसंद ‘पबजी’ है। यह एक ऐसा ऑनलाइन वीडियो गेम है जिसमें युवा एक मिशन पर चार दोस्तों के साथ ग्रुप में निकलता है, जहां वह कभी अपने दुश्मनों को गोलियों से उड़ता है, तो कभी लुटपाट करता है।
डिजिटल युग में बिना इंटरनेट मानों, हमारी जिंदगी सुनी है... अब देखिए न खेलने के लिए भी हम डिजिटल माध्यम पर निर्भर जो होने लगे हैं।
लेकिन, सवाल यह उठता है जब हम हमारी दुनिया में ये डिजिटल युग ने एंट्री नहीं ली थी तो हम अपनी जिंदगी कैसे व्यतित करते थे? याद करें, वो 90 के दशक का जमाना जब न हमारे पास मोबाइल फोन थे और न ही इंटरनेट... अगर आप थोड़ा याद करेंगे, तो महसूस होगा बचपन की शामों जैसा कुछ नहीं था... न मोबाइल फोन, न पबजी, न इंटरनेट... कुछ भी नहीं।
भले ही उस जमाने में पबजी नहीं था, लेकिन कई ऐसे खेल जरूर थे... जिन्हें खेलने के लिए हम पबजी से भी ज्यादा एडिक्टेड थे। उन खेलों के साथ हमारी शामें रंगीन हुआ करती थी और मालूम भी नहीं पड़ता था कि कब सूरज ढल गया और रात हो गई... याद कीजिए... कैसे मम्मियां हमें मार-मारकर घर बुलाया करती थी कि घर आ जाओ 8 बज गए हैं, वरना पापा को बता दूंगी।
आज भी देखिए किन-किन खेलों को खेलकर 90 के दशक के बच्चे बड़े हुए हैं-
छुपन-छुपाई
पकड़म-पकड़ाई
खो-खो
बर्फ पानी
कंचे
राजा, मंत्री, चोर सिपाही
नाम, वस्तु, स्थान
रस्सी कूदना
स्टापू
लूडो
कैरम
गिट्टे
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