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नवरात्रि के दिन शुरू हो चुके हैं और ऐसे में लोगों ने देवी मां को प्रसन्न करने के लिए अपनी ओर से काफी तैयारियां भी कर ली हैं। इस दौरान कुछ लोग पूरे दिन व्रत रखकर मां की अर्चना करते हैं, तो वहीं लोगों के घरों में लहसुन और प्याज सहित कई चीजों का इन 9 दिनों में परहेज किया जाता है। लेकिन हम में से कितने ही लोग ऐसे हैं जो यह जानते हैं कि आखिर क्यों नवरात्रों में लहसुन और प्याज का सेवन छोड़ दिया है। वैसे इसके पीछे कई तरह की धार्मिक मान्यताओं के बारे में बताया गया है। लेकिन कई वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि यह तामसिक भोजन की श्रेणी आते हैं।
दरअसल हिन्दू धर्म में भोजन को तीन भागों में बांटा गया है- राजसिक, तामसिक और सात्विक। आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए राजसिक और तामसिक भोजन से दूर रहने के लिए कहा जाता है। यह शारीरिक इच्छाओं को जन्म देता और मानसिक सुस्ती को बढ़ाता है। प्याज और लहसुन के सेवन से इंसान में कामुक इच्छा बढ़ने लगती है। सिर्फ इतना ही नहीं इसकी वजह से पेट में गर्मी पैदा होती है और पाचन तंत्र खराब हो जाता है।
इसे खाने से लोग अपनी इच्छाओं को नियंत्रण में नहीं रख पाते। इसीलिए इसे व्रत के दिनों में खाने से मना किया जाता है, ताकि उपासना से ध्यान न भटक सके। कहा जाता है कि इसमें तेज गंध होती है जिस कारण इसे अपवित्र माना जाता है औक देवताओं के भोग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। वैसे इसके अलावा लहसुन और प्याज को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी बनी हुई हैं।
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