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कल से शुरु होने वाला है चैत्र नवरात्रि। इसी के साथ हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नया साल भी लगने वाला है। बता दें कि वैसे तो साल में कई बार नवरात्रि आते हैं लेकिन इन सबमें सबसे अहम होते हैं चैत्र और दूसरे शरद नवरात्रि। बता दें कि इन दोनों में कई खास अंतर होते है। जिसकी वजह से इनको साल के अलग अलग समय में मनाते हैं।
क्या होते हैं नवरात्रि
साल में दो बार जोर-शोर से मनाया जाने वाले इस त्यौहार में मां दुर्गा के 9 अवतार की पूजा होती है। इसी के साथ 9 दिन लोग मां की पूजा के साथ साथ व्रत भी रखते हैं। सबसे पहले कलश स्थापना होती है इसके बाद ही पूजा अर्चना शुरु होती है। नो दिन दुर्गा मां के नो अवतार की पूजा के बाद 10वें दिन दुर्गा पूजा होती है। इसके साथ एक और मान्यता जुडी हुई है, जिसके तहत भगवान राम ने रावण का वध करने के लिए मां दुर्गा के पूरे 9 अवतार की पूजा की थी।
क्या है चैत्र नवरात्रि
वसंत ऋतु के खत्म होने बाद चैत्र नवरात्रि आती हैं। पूजा का विधि विधान एक दम शरद नवरात्रि जैसे होता है लेकिन 9 दिन के बाद 10वें दिन दशहरा नहीं मनया जाता है इसी के साथ भव्य दुर्गा पूजा भी नहीं होती है। बता दें कि भारत के अलग अलग हिस्सों में इस त्यौहार को अलग नाम से पुकारा जाता है- महाराष्ट्र में गुडीपढवा, कशमिरी हिंदू इसे नवरे के नाम से मनाते हैं वहीं तमिल नाडू आंध्र प्रदेश, तेलनगाना, और कर्नाटक में इसे उगादी के तौर पर जाना जाता है। इसी के साथ इसे वसन्त नवरात्रि भी कहते हैं।
शरद नवरात्रि
इसको महावरात्रि भी कहते हैं। शरद शुक्ल पक्ष में पडने वाले इन नवरात्रि के बाद दशहरा आता है। इसी के साथ 10 दिन बाद दिपावली का शुभ अव्सर भी आता है। बता दें कि 9 दिन के बाद देश भर में भव्य दुर्गा पूजा होती है। इसी के साथ इन 9 दिनों जगह जगह पर रामायण भी दिखाई जाती है।
दुर्गा मां के रूप
इस नवरात्रि में माँ दुर्गा के 9 रूप- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
Anida Saifi
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