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भले ही भूत-प्रेत में विश्वास हो या न हो, लेकिन रोमांच के लिए दर्शक हॉरर फिल्में देखना पसंद करते हैं। हॉरर फिल्मों की अपनी अलग ही सफलता होती है, जिसकी वजह से हर क्षेत्र की फिल्म इंडस्ट्री इस तरह की फिल्में बनाकर अपना बिजनेस चलाती हैं... वो चाहे टॉलीवुड हो, बॉलीवुड हो या फिर हॉलीवुड। हालांकि, फिल्म चाहे बॉलीवुड की हो या हॉलीवुड की... कुछ बातें सभी हॉरर फिल्मों में एक जैसी ही होती है।
बार-बार वो चीज़ें देखकर आपका दिमाग झन्ना जाता है। आज आपके लिए हॉरर फिल्मों की कुछ ऐसी ही बाते लेकर आए हैं-
कौन है वहां...
हॉरर फिल्मों में भूत का परिचय कुछ इसी तरह होता है। भूत भाईसाहब अपने होने का आहसास इंसानों को दिलाते हैं... कभी रोने की आवाज निकालते हैं... तो कभी हंसने की.... तो कभी दौड़ने की! इन आवाजों की आहटों को सुनकर बेचारा इंसान भी पूछ ही लेता हैं “कौन है वहां... मैंने पूछा कौन है वहां...”। जैसे की भूत जी अपना बायोडेटा लेकर उनके लिए खड़े होंगे!
आइने में दिखने वाली रूह
बचपन से हमने यही सुना है कि जो भूत लोग होते हैं, वो आइने में नहीं दिखाई देते। सुना भी इन्हीं फिल्मों से है। लेकिन समय के साथ-साथ यह फिल्म बनाने वाले ही अपनी बातों से मुकर जाते हैं। पहले कहते थे भूत आइने में नहीं दिखते और अब आइने में देखों तो पीछे प्रेत आत्मा अपने रौद्र अवतार में खड़ी रहती है और पीछे मुड़कर देखो तो कोई होता ही नहीं है। (Uffff)
बड़े भूत बंगले में लाइटों की होने वाली बचत
जिन फिल्मों में आत्मा का कहर दिखाना होता है, उनके घर में अंधेरा दिखाना फिल्म इंडस्ट्री की एक प्रथा है। जैसे सारी बिजली इन्हें ही बचानी है। मतलब इतने बड़े घर में आपको अकेले रहना है और अंधेरा भी करना है। भूत तो बिना इंविटेशन आएगा ही।
जंगलों के बीच का सुनसान घर
यह एक और बात... मतलब पूरी दुनिया में आपको छुट्टी बिताने के लिए या फिर घर खरीदने के लिए एक ऐसा ही सुनसान घर व बंगला क्यों मिलता है जो जंगलों के बीचो-बीच होता है। भूत हो या न हो... इतने सन्नाटे से ही किसी की जान निकल जाए।
अंधेरे बेसमेंट में चले जाना
इन हॉरर फिल्मों में एक ‘खतरों का खिलाड़ी’ भी जरूर होता है। वो खतरों का खिलाड़ी... जो डरावनी आवाजें सुनकर भी उसके पीछे-पीछे अंधेरे कमरे या बेसमेंट में चले जाता है।
ग्रुप में लोगों का अलग-अलग हो जाना
हॉरर फिल्मों में दिखाई जाने वाली एक और महान वाहियात बात। 3 या 4 लोगों का ग्रुप होता है, जिनकी भूत के डर से पहले ही पेंट गीली है और वो लोग भूत को ढूंढने के लिए अलग-अलग हो जाते हैं। मतलब, कहां से आते हैं ऐसे Dumb आइडिया।
एक दोस्त जो देता है भूतों को न्यौता
हर फिल्म में एक नालायक शख्स जरूर होता है, जो अपने मज़े के लिए भूतों को उंगली करता है और उसके बेवकूफी का खामियाजा फिल्म के सभी लोगों को भुगतना पड़ता है।
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