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कुछ समय पहले की ही बात है जब महाराष्ट्र के सरकारी हॉस्पिटल में एक बहुत अजीबोग-गरीब बच्चे का जन्म हुआ। इस बच्चे का निचला हिस्सा आपस में जुड़ा हुआ था और यह बिल्कुल एक जलपरी जैसी दिख रहा था। आपने अक्सर जलपरी के बारे में कहानियों में सुना होगा, लेकिन यह सचमुच होती भी हैं या सिर्फ लोगों का भ्रम है। इस बच्चे को देखकर हैरान था, लेकिन वह केवल 15 मिनट तक ही जीवित रह पाया। अब सवाल यह उठता है कि क्या वाकई यह कोई जलपरी थी? लेकिन साइंस की नजरों से देखा जाए तो यह 'मर्मेड सिंड्रोम' होता है, जिसे डॉक्टर्स ने साइरेनोमेलिया का नाम दिया है।
यह सिंड्रोम 60,000-1 लाख में से एक बच्चे में देखने को मिलता है। कम ही लोग ऐसे होंगे जिन्हें इसके बारे में कोई जानकारी होगी। आज हम आपको इसी सिंड्रोम के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां देने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने शायद कभी सुना भी नहीं होगा।
क्या है ये बीमारी
यह एक ऐसी बीमारी है, जो बच्चों में जन्म के साथ ही होती है। इसमें बच्चों का ऊपरी हिस्सा किसी भी दूसरे बच्चे जैसा ही होता है, जबकि नीचे के पैर एक मछली की तरह जुड़े रहते हैं। यही कारण इस बीमारी को मर्मेड सिंड्रोम का नाम दिया है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि इसमें बच्चे के पैर ही जुड़े हो। बल्कि ऐसा भी होता है कि इसमें बच्चे की रीढ़ की हड्डी न हो, किडनी न हो, ब्लैडर न हो। या फिर ये अंग ठीक से काम न करते हो।
कैसे हो सकता है इलाज
कई बच्चे ऐसे भी देखे गए हैं जिनमें इस सिंड्रोम का थोड़ा ही असर देखा गया है। जैसे ही उनके पूरी तरह नहीं बल्कि थोड़े-बहुत ही जुड़े होते हैं। लेकिन जिन बच्चों का साइरेनोमेलिया हो उनका इलाज सर्जरी से ही हो सकता है। बहुत सी सर्जरी ऐसी भी होती है कि जिसमें बच्चे की जान तक नहीं बचाई जा सकती। लेकिन 2004 में पेरु में इसी सिंड्रोम से ग्रस्त एक बच्ची का जन्म हुआ, इसके बाद जब वह बच्ची 9 महीने की हुई तो सर्जरी के जरिए उसके जुड़े हुए पैरों को अलग कर दिया गया। अच्छी देखभाल करने के बाद बच्ची से चलना-फिरना भी शुरू कर दिया, लेकिन एक आम बच्चे जैसी जिंदगी जीने के लिए इस बच्ची की कई सर्जरी करवाई गई।
क्यों होती है ये बीमारी
इस बीमारी के होने की सही वजह अब तक डॉक्टर्स ठीक से नहीं बता पाए हैं। वहीं दूसरी ओर कई शोधकर्ताओं का मानना है कि, यह जेनेटिक परेशानी हो सकती है। हालांकि इस बारे में भी पूरी तरह से पुष्टि नहीं की गई है। कहा जाता है कि, इस बीमारी के होने का कारण गर्भावस्था में महिला को होने वाली परेशानी भी हो सकता है। जैसे कि, प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को कोई बीमारी, खाने-पीने की कमी, कुछ दवाईयों का साइड इफेक्ट या फिर मानसिक तौर पर अशांति रहने पर गर्भ में बच्चे का ठीक से विकास न हो पाया हो। भले ही इसका अब तक कोई कारण सामने नहीं आ पाया है, लेकिन किसी भी गर्भवती महिला के जरूरी है कि वह अपना पूरा ध्यान रखे।
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