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बिहू असम का सबसे लोकप्रिय त्यौहार होता है। इसे असम का गौरव भी कहा जाता है, जिसमें असम की प्राकृतिक सौंदर्य, प्रेम व संस्कृति की झलक दिखाई देती है। इस साल ये त्यौहार 15 अप्रैल को मनाया जा रहा है। हालांकि, आज मनाए जाने वाले बिहू को ‘बोहाग बिहू’ या फिर ‘रोंगाली बिहू’ भी कहा जाता है। वैसे तो इस त्यौहार को नए साल की शुरुआत का प्रतिक माना जाता है।
आपको बता दें, बोहाग बिहू के अलावा असम में तीन तरह के बिहू त्यौहार मनाए जाते हैं, जो हैं... माघ बिहू (जनवरी), रोंगाली बिहू (मध्य अप्रैल) और काति बिहु (मध्य अक्टूबर) में मनाया जाता है। आज से रोंगाली अथवा बोहाग बिहू प्रारंभ हो रहा है, जोकि 21 अप्रैल तक चलेगा।
आज के दिन को असम के लोग बिहू नृत्य और बिहू लोक गीत दोनों के साथ मनाते हैं। यह त्यौहार मस्ती से भरा होता है, जिसमें जाति, धर्म और विश्वास में भेद किए बिना हर कोई बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ इस दिन को खुशियों से भरते हैं।
आज के दिन असमी लोग रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाक पहनते हैं। पोशाक में लड़कियां असम की पारंपरिक साड़ी पहनती है, जिसे पहनने का भी तरीका काफी अलग होता है।
वहीं अपने दोस्तों व रिश्तेदारों को नए साल की शुभकामनाएं देते हैं।
वे इस अवसर पर उन्हें मिठाइयां व तौहफे देकर बिहू की बधाईयां देते हैं।
बिहू पर फेमस है विशेष पीठा-
आज के दिन मिठाइयों में सबसे खास होता है पीठा, जोकि तिल और नारियल से बना एक खास किस्म का लड्डू होता है।
इस दिन लोग ईश्वर की पूजा के साथ-साथ गाय व भैंसो की भी पूजा करते हैं और उन्हें घर का बना भोजन खिलाते हैं।
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