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शॉपिंग पर जाते वक्त हाथ में थैला ले जाने का जमाना जा चुका है, आज के जमाने में हर कोई फ्री माइंड और फ्री हैंड (हाथ) के साथ शॉपिंग पर निकलता है। लेकिन हद तब हो जाती है जब शॉपिंग मॉल या स्टोर से हजारों की शॉपिंग करने के बाद भी स्टोर वाले एक कैरी बैग के लिए आपसे एक्स्ट्रा पैसे लेने से नहीं चूकते। हम भी बिना किसी सवाल-जवाब के 5-10-20 रूपये चुपचाप से उन्हें थमा देते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या वाकई कंपनी अपने ग्राहक से इस तरह कैसी बैग के लिए एक्स्ट्रा पैसे वसूल कर सकती है? जवाब है... नहीं।
ये जवाब हमें हाल ही में सामने आए एक केस के बाद मिला।
आइए जानते हैं क्या है वो मामला-
मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 23-बी में रहने वाले दिनेश प्रसाद का है। हाल ही में वह सेक्टर-33डी के बाटा शोरूम में शॉपिंग करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने एक जोड़ी जूते खरीदे। इन जूतों का दाम था 399 रुपये। लेकिन जूतों के साथ जो बिल सामने आया, वो था 402 रूपये। दरअसल इसमें 3 रुपये कंपनी ने कैरी बैग के लिए चार्ज कर लिए थे। दिनेश ने जब बिल देखा, तो उन्हें सही नहीं लगा। दिनेश का मानना है कि अपने कैरी बैग से कंपनी खुद का ही प्रचार कर रही है और उसके लिए भी हम लोगों से पैसे चार्ज करना सही नहीं है। दिनेश ने पैसे रिफंड को लेकर कंज्यूमर फोरम में इसकी शिकायत डाल दी।
कंज्यूमर फोरन में कंपनी को दोषी पाया और कंपनी पर मोटा जुर्माना लगा दिया। फोरम का कहना है कि ग्राहक को कैरी बैग के लिए मजबूर करना गलत है। सुविधा और अपनी सर्विस की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए कंपनी को कैरी बैग मुफ्त देना चाहिए।बाटा ने 3 रुपये लौटाने के साथ उसे 3 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया वहीं 1000 रुपये मुकदमा का चार्ज और 5 हजार रुपये उपभोक्ता कानूनी सहायता खाता में जमा करवाना पड़ा। इस लिहाज से कंपनी को 3 रुपये के चक्कर में कुल मिलाकर 9 हजार रुपये जुर्माने के तौर पर देने पड़े।
आप भी कर सकते हैं केस-
अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ होता है, तो आप भी कंज्यूमर फोरम में अपनी शिकायत कर सकते हैं। आप ग्राहक जिला कंज्यूमर फोरम में सेक्शम 12 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहते केस दर्ज कर सकते हैं। अगर आप अपने केस में वकील हायर नहीं करना चाहते, तो 10 रुपये के स्टेम्प पर शपथ पत्र दे सकते है, जिसमें आपको केस से जुड़े फैक्ट, एविडेंट और बिल लगाना होगा।
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