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हम में से कितने ही लोग ऐसे हैं जो पक्षियों के बारे में सोचते हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि गर्मियों के दिनों में लोग मिट्टी के बर्तनों में पानी भरकर अपनी छतों पर रख देते हैं। लेकिन कंक्रीट जंगलों में रहने वाले पक्षियों की हालत बहुत दयनीय है। पिछले कुछ समय में जल का स्तर काफी घटता जा रहा है। गर्मियां शुरू होते ही तालाब और नहरें भी सूखने लगते हैं। ऐसे में पक्षियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए नालियों का रुख करना पड़ता है। लेकिन इस बीच में श्रीमन नारायणन नाम एक ऐसा शख्स सामने आया है जिसने पक्षियों के लिए अच्छा और साफ पानी जुटाने का जिम्मा उठाया है। बता दें कि, श्रीमन नारायणन केरल के एर्नाकुलम जिले के Muppathadan गांव के रहने वाले हैं।
कुदरत की रक्षा के लिए करते हैं ऐसे काम
खबरों के अनुसार, 70 साल के श्रीमन नारायणन एक राइटर हैं, जिसके लिए उन्हें अवॉर्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा वह लॉटरी डीलर भी रह चुके हैं। लेकिन आज वह अपनी जिंदगी का ज्यादा से ज्यादा वक्त सिर्फ कुदरत को संवारने और इसकी रक्षा करने में बिता रहे हैं। गर्मियों के दिनों में लोगों को मुफ्त में मिट्टी के बर्तन बांटते हैं ताकि वह अपने घरों के बाहर या छतों पर पक्षियों के लिए उसमें पानी भरकर रखें।
पक्षियों की जरूरत को पूरा करने के लिए कर चुके लाखों रुपए खर्च
आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीमन नारायणन पक्षियों के लिए अब तक 6 लाख रुपए खर्च कर चुके हैं। रिपोर्ट्स की माने तो उन्होंने बीते वर्ष ही एर्नाकुलम जिले में करीब 15 लाख रुपए का खर्चा करके लोगों को 50 हजार पौधे दिए। इसके अलावा वह खुद अपने गांव में 10 हजार पेड़ भी लगा चुके हैं। श्रीमन नारायणन हमेशा अपने गांव के लोगों से कहते हैं उन्हें अपने घर के बाहर कम से कम एक फल वाला पेड़ जरूर लगाना चाहिए, ताकि पक्षी उससे अपना पेट भर सकें।
तो इसलिए मुफ्त में बांटते हैं मिट्टी के बर्तन
श्रीमन नारायणन हर किसी को सिर्फ इसी मकसद के साथ बर्तन देते हैं ताकि वह अपने घरों में पक्षियों के पानी रखें। उनका कहना है कि, वे बेजुबान होते हैं और खुद तो पानी मांग नहीं सकते। इसीलिए हमें ही यह पहल करनी होगी कि हम सभी पक्षियों के लिए बर्तनों में पानी भरकर रखें। ऐसे में हम इंसान ही उनका एक मात्र जरिया होते हैं। सिर्फ एक बर्तन पानी में ही 100 पक्षियों की प्यास बुझा सकता है।
मिल चुका है सम्मान
श्रीमन नारायणन मलयालम और अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन कर चुके हैं। वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने उन्हें उनकी कविता 'कुट्टीकालुडे गुरुदेव' के सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें पर्यावरण में सुधार और रक्षा करने के लिए कुछ ही समय पहले SK Pottekkatt अवॉर्ड से नवाजा गया है।
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