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लोग अक्सर टैक्स चुकाने से बचे रहना चाहते हैं। कई बार लोग ज्यादा आमदनी होने पर भी टैक्स बचा लेते हैं या फिर अक्सर वह सिर्फ नाम मात्र के लिए थोड़ा बहुत टैक्स देकर ही पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन अब इस तरह के लोगों पर टैक्स विभाग का पहरा और ज्यादा सख्त हो गया है। इसे और साफ करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नियोक्ताओं से और अधिक जानकारी मांगी है। सिर्फ इतना ही नहीं फॉर्म-16 का आकार बढ़ा दिया गया है। इस नए फॉर्म के पार्ट बी वाला हिस्सा 2 पन्नों से बढ़ाकर 5 का कर दिया गया है।
हालांकि वित्त मंत्रालय की ओर से फॉर्म-16 में बदलावों की यह अधिसूचना 12 मई 2019 से लागू की जाने वाली है। इसके बाद वर्ष 2018-19 के लिए जिन भी कर्मचारियों को नियोक्ता की ओर से फॉर्म-16 दिया जाएगा वह प्रोफार्मा पर होगा। अब इस नए फॉर्म में वित्त वर्ष के दौरान अगर कोई कर्मचारी एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जाता है तो उसकी पूर्व कंपनी से प्राप्त होने वाले कुल वेतन का कॉलम भी जोड़ा गया है।
इसे कुल वेतन वाले पहले कॉलम में जगह दी गई है। जबकि पुरान फॉर्म-16 में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया था। इसके अलावा डिडक्शन को भी एक विशेष स्थान पर रखा गया है। इस नए फॉर्म के अंतर्गत सभी को डिडक्शन विस्तार से बताना अनिवार्य होगा।
इसलिए अब नहीं कर पाएंगे कोई धोखाधड़ी
आयकर विशेषज्ञ और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीण कुमार के मुताबिका, अगर नियोक्ताओं से फॉर्म-16 में ज्यादा जानकारी मांगी जा रही है तो, नियोक्ता को भी कर्मचारियों से अधिक से अधिक जानकारी लेनी होगी। ऐसे में सभी कर्मचारियों को अपने एक-एक डिडक्शन के बारे में विस्तार से सही जानकारी देनी होगी और वह किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा करने की कोशिश करते हैं तो किसी भी तरह से बच नहीं पाएंगे।
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