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हर शख्स दिन-रात सिर्फ इसीलिए कड़ी मेहनत करता है कि ताकि उसके सिर पर छत और दो वक्त की रोटी हमेशा मिलती रहे। लेकिन एक देश ऐसा भी है जहां खूब पसीना बहाने के बावजूद आपको रहने के लिए घर नहीं मिलता। दरअसल हम यहां हांगकांग की बात कर रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े बाजार और आर्थिक रूप से धनी कहे जाने वाले इस देश में लोग पिंजरे में रहने को मजबूर हो गए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि यह लोहे के पिंजरे भी लोगों को आसानी से नहीं मिल पाते। बल्कि इसके लिए भी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
खबरों के मुताबिक कहा जाता है कि, इन पिंजरों में रहने के लिए भी लोगों को 11 हजार रुपए किराया देना पड़ता है। यहां आपको बहुत सी ऐसी चीजे देखने के लिए मिलेंगी जिन्हें देखकर आप चौंक जाएंगे। दरअसल जो मकान खंडहर हो चुके हैं उन जगहों पर इन पिंजरों को रखा गया है। इन एक-एक अपार्टमेंट्स में 100 पिंजरें रखें गए हैं। जबकि एक अपार्ट्मेंट में केवल 2 ही टॉयलेट्स की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इस कारण यहां रहने वाले लोगों को काफी मुश्किलें भी झेलनी पड़ती हैं।
इनकी परेशानियां सिर्फ यहीं पर ही खत्म नहीं हो जाती, कमरों की बजाय ये लोग पिंजरे में रहने को तो मजबूर हैं ही इसके अलावा इसका साइज भी बेहद छोटा है। कुछ पिंजरे सिर्फ एक केबिन जितने ही बड़े हैं और कुछ में तो ताबूत के बराबर ही जगह है। इन पिंजरों में बिछाने के लिए लोगों के पास गद्दे तक नहीं है। बल्कि वह इसमें बांस की बनी चटाई बिछाकर सोते हैं।
खबरों की माने तो हांगकांग में इस तरह के घरों में रहने वाले लोगों की संख्या लगभग एक लाख से भी ज्यादा है। आपको बता दें कि, वर्ष 2012 में यहां प्रोपर्टी के रेट करीब दोगुने हो चुके थे इसके बाद से लोगों के लिए यहां घर खरीद माना बेहद मुश्किल हो चुका है। इन पिंजरों में रहने वाले ऐसे लोग हैं जो इन महंगे घरों को खरीदने में सक्षम नहीं है।
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