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कबीरदास जी ने लिखा है कि ‘मधुर वचन है, औषधि कटु वचन है तीर’ जिसका तात्पर्य है कि मीठी वाणी दवा के समान होती है जबकि कड़वे शब्द तीर के समान होता है जोकि पूरे शरीर में जहर की तरह घुलती है। अपने जीवन में एक बात तो हर किसी ने महसूस किया होगा कि शब्दों का असर जितना दिल पर पड़ता है उससे ज्यादा दिमाग पर पड़ता है, चाहे वो अच्छे शब्द हों या बुरे। यहां तक कि अगर कोई किसी बच्चे या बड़े के साथ लगातार बुरे शब्दों के साथ पेश आ रहा हो तो उस पर इन शब्दों का असर जीवन पर्यन्त तक बना रह सकता है, जिसके फलस्वरूप उसे कई तरह की मानसिक बीमारियां हो सकती हैं। किसी के साथ बुरे और कड़वे शब्दों के साथ पेश आने को ही मौखिक दुर्व्यवहार (verbal abuse) कहते हैं।
मौखिक दुर्व्यवहार मानसिक पटल पर ऐसी हलचल मचा देता है कि व्यक्ति चिंता, डर और घबराहट की स्थायी स्थिति में चला जाता है जिसे कि हम एंग्जाइटी कहते हैं। अक्सर लोगों की सोच होती है कि शारीरिक दुर्व्यवहार ही ज्यादातर मानसिक बीमारियों का कारण होता है जबिक ये पूरी तरह से गलत है, मौखिक दुर्व्यवहार से चिंता डिप्रेशन, आत्मघाती विचार, माइग्रेन, भोजन विकार, पाचन संबंधी समस्या, अत्यधिक सोच, अनिश्चितता, उत्साह में कमी और आत्मसम्मान की कमी जैसी चीजें देखने को मिल सकती हैं।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि और लंबे समय तक किए गए मानसिक शोषण के फलस्वरूप एंग्जाइटी का जन्म होता है इन दोनों के बीच एक मजबूत संबंध है। लगातार तनाव और आघात विभिन्न मानसिक विकारों को जन्म देते हैं, जिनमें से एक चिंता भी है। हालांकि, कई लोग मानसिक शोषण के गंभीर नकारात्मक प्रभावों को नजरअंदाज करते हैं, लेकिन यह वास्तव में उतना ही हानिकारक है जितना कि शारीरिक शोषण।
बहुत ज्यादा अपमानित होने वाले लोग बहुत ज्यादा पीड़ित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो साइबरबुलिंग और वास्तविक जीवन में मौखिक दुर्व्यवहार दोनों मनुष्य के लिए गंभीर रूप से खतरनाक हैं, क्योंकि ये मानव मस्तिष्क को इस तरह से प्रभावित करते हैं कि कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को जन्म दे सकते हैं।
क्या होता है मौखिक दुर्व्यवहार-
आमतौर पर, मौखिक दुर्व्यवहार में कुछ प्रकार की मौखिक बातचीत शामिल होती है जो किसी व्यक्ति को भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाती है। किसी की हमेशा आलोचना करना या उसका मजाक उड़ाना, अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना, अपमानजनक टिप्पणियां करना आदि मौखिक दुर्व्यवहार की श्रेणी में आते हैं।मौखिक दुर्व्यवहार के शिकार व्यक्ति ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहां उन्हे अपने वजूद पर शक होने लगता है, वे अपने आप को मूर्ख, बेकार और धरती पर बोझ महसूस करने लगते हैं।
Anida Saifi
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