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हर साल 3 मई को अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1993 में संयुक्त महासभा की ओर से तय किया गया था। प्रेस की आजादी जताने के लिए घोषणा की गई थी कि हर साल 3 मई को वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे मनाया जाएगा। इसके साथ ही अगर किसी पत्रकार की नौकरी के बारे में बात की जाए तो यह बिल्कुल आसान नहीं होती, बहुत सारे मामले उनके सामने ऐसे आते हैं जिन्हें दुनिया के सामने रखने के लिए उन्हें अपनी जान की बाजी तक लगानी पड़ जाती है। आज ऐसे खास दिन पर हम आपको कुछ ऐसे पत्रकारों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने खबरों का सच जानने के लिए अपनी जान तक गंवा दी।
गौरी लंकेश:- लोकप्रिय पत्रकार गौरी की हत्या का मामला भी काफी सुर्खियों में रहा। जब बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में स्थित उनके घर में घुसकर कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने 5 सितंबर 2017 को उनकी हत्या कर दी।
राजदेव रंजन:- सीवान के रहने वाले पत्रकार राजदेव 13 मई 2016 को दफ्तर से अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ता में अचानक गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
अक्षय सिंह:- वर्ष 2015 में मध्य प्रदेश में चल रहे व्यापार घोटाले की कवरेज करने के लिए गए थे। लेकिन बाद में संदिग्ध हालातों में उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी मौत की वजह जहर बताई जा रही थी, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर की जांच नहीं हो पाई।
एम.वी. शंकर:- आंध्र प्रदेश में हो रहे तेल माफिया के खिलाफ लगातार लिखने वाले एम.वी. शंकर की 26 नंवबर 2014 को मौत के घाट उतार दिया गया।
रामचंद्र छत्रपति:- डेरा सच्चा सौदा का मामला लंबे वक्त से चला आ रहा था। इसके प्रमुख गुरमीत के खिलाफ पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने आवाज उठाई। उन्होंने इस डेरे में चलने वाले गलत कामों का कच्चा चिट्ठा दुनिया को दिखाना शुरू कर दिया। लेकिन इस दौरान 21 नवंबर 2002 में उनके ऑफिस में कुछ लोगों ने घुसकर उन्हें गोली मार दी।
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