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रमजान आ गये हैं और इसी बीच हर तरफ से एक ही खबर सुनने के लिए आ रही है कि रुह अफजा खत्म हो गया है। गर्मी में प्यास बुझाने के लिए खास काम करता है। हर किसी के मन को भी भाता है। बता दें कि इसके मार्केट से खत्म होने के पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं। इसी के साथ गर्मी में इसकी मांग और बढ़ रही है। जानिये रूपअफजा की पूरी कहानी।
खोज
साल 1906 में हकीम अब्दुल मजीद द्वारा इसे खोजा गया था। दिल्ली के लाल कुआं में अब्दुल मजीद की युनानी दवाओं की दुकान थी जिसका नाम था हमदर्द। इसको एक दवाई के तौर पर बनाया गया था। जो एक नॉन-एलकोहोलिक ड्रिंक थी। दिल्ली में पड़ने वाली गर्मी के लिए इसे खास तौर पर बनाया गया। जो गर्मी की लू में आपको ठंडी राहत दे सके। कांच की बोतल में बंद ये सीरप फल, सब्जी, और जड़ों से बना होता है। इसी के साथ इसमें चीनी का सीरप भी डाला जाता है। कहते हैं कि दुकान में एक ही दिन आने के बाद लोगों को इसका स्वाद खूब भाया था। इसी वजह से इसकी 100 बोतलें एक दिन में बिक गयी थी। दवा के तौर पर बनी इस ड्रिंक को लोगों के घरों में पहुंचने में देर नहीं लगी। दिल्ली में निहारी, बेदमी बूरी के बाद रूह अफजा भी इसी तरह से मशहूर हो गया था।
<blockquote class="twitter-tweet" data-lang="en-gb"><p lang="en" dir="ltr">The name <a href="https://twitter.com/hashtag/RoohAfza?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#RoohAfza</a> was adopted from the book Masnavi Gulzar-e-naseem written by Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnavi. RoohAfza was a character in the book. Pic: cover of the <a href="https://twitter.com/hashtag/book?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#book</a>.<a href="https://twitter.com/hashtag/URDU?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#URDU</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Hamdard?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Hamdard</a> <a href="https://twitter.com/iamrana?ref_src=twsrc%5Etfw">@iamrana</a> <a href="https://twitter.com/DalrympleWill?ref_src=twsrc%5Etfw">@DalrympleWill</a> <a href="https://twitter.com/UsamaQureshy?ref_src=twsrc%5Etfw">@UsamaQureshy</a> <a href="https://twitter.com/RoohAfzaIndia?ref_src=twsrc%5Etfw">@RoohAfzaIndia</a> <a href="https://twitter.com/DalrympleWill?ref_src=twsrc%5Etfw">@DalrympleWill</a> <a href="https://t.co/4Lk1RTq5H9">pic.twitter.com/4Lk1RTq5H9</a></p>— Heritage Times (@HeritageTimesIN) <a href="https://twitter.com/HeritageTimesIN/status/1126010543058214912?ref_src=twsrc%5Etfw">8 May 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
1947 तक हर एक दिल्ली वासी के घर में इसको देखा जा सकता था। सन 1947 के दंगो के बाद सितंबर के महिने में जब देश के मुसलमान मुल्क छोड़कर जाने लगे तो इस समय हमदर्द के दो हिस्से हो चुके थे। जिसमें से एक देश में ही रह गये और दूसरे भाई पाकिस्तान के काराची में जा बसे।
बात करें हमदर्द पाकिस्तान की तो वहां पर बस दो कमरों में इसकी शुरू किया गया था। इसके बाद पाकिस्तान में भी इसका इतना ही जादू चला और कुछ टाइम बाद ही इसको लोगों ने खूब पसंद किया। पाकिस्तान और बांगलादेश के आखिरी विभाजन के बाद 1971 में हमदर्द पाकिस्तान ने हमदर्द बांगलादेश को जन्म दिया।
क्यों हुआ गायब
इफ्तारी की रौनक रूह अफजा के मार्केट में खत्म होने के पीछे कई कारण बताएं जा रहे हैं। सबसे पहले तो खबरें आ रही है जिसके मुताबिक इसके संस्थाकों का कहना है कि इसमें पडने वाली जडी बूटी आसानी से नहीं मिलती है। इसी लिए इसको बनाने में परेशानी आ रही है। इसी लिए मार्केट में रूह अफजा आपको कम दिखने को मिल रहा है।
मगर दूसरी ही तरफ एक और बात है जो आज कल तेजी से फेल रही है। उसके मुताबिक हमदर्द के संस्तथापक हकीम अब्दुल मजीद के बेटे और इनके कजिन के बीच नाइत्तेफाकी चल रही है। जिसमें ये निर्धारित नहीं हो पा रहा है कि इसकी गद्दी पर कौन बैठेगा। इसी के साथ पड़ोसी मुल्क से भी मदद की लिए हाथ आगे आ रहा है। कि पाकिस्तान हमदर्द देश में रूह अफजा पहुंचाने को तैयार है।
<blockquote class="twitter-tweet" data-lang="en-gb"><p lang="en" dir="ltr">As <a href="https://twitter.com/hashtag/Ramzan?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Ramzan</a> is approaching new arrival of <a href="https://twitter.com/hashtag/RoohAfza?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#RoohAfza</a> from <a href="https://twitter.com/hashtag/Karachi?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Karachi</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Hamdard?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Hamdard</a> & decoration of the stores started. From Indian store <a href="https://twitter.com/HyperNestO?ref_src=twsrc%5Etfw">@HyperNestO</a> somewhere in <a href="https://twitter.com/hashtag/SaudiArabia?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#SaudiArabia</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Food?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Food</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Drinks?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Drinks</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Ramzan?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Ramzan</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Culture?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Culture</a> <a href="https://twitter.com/kaaashif?ref_src=twsrc%5Etfw">@kaaashif</a> <a href="https://twitter.com/zarhashemi?ref_src=twsrc%5Etfw">@zarhashemi</a> <a href="https://twitter.com/n98gillani?ref_src=twsrc%5Etfw">@n98gillani</a> <a href="https://twitter.com/IndoIslamicPage?ref_src=twsrc%5Etfw">@IndoIslamicPage</a> <a href="https://t.co/12GG37tTIP">pic.twitter.com/12GG37tTIP</a></p>— Tawarikh Khwani تواریخ خوانی (@tawairkh) <a href="https://twitter.com/tawairkh/status/1122052377014566912?ref_src=twsrc%5Etfw">27 April 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
Anida Saifi
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