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मां एक ऐसा शब्द है, जिसमें हमारी दुनिया बसती है और इसी मां को सम्मान देने के लिए आज का दिन बनाया गया है ‘मदर्स डे’। लेकिन कोई मां के लिए केवल एक दिन कैसे तय कर सकता है... क्योंकि मां तो हर दिन हर घंटे और हर पल आपके लिए खड़ी रहती है। उनके जीवन से ही तो हमारा जीवन है... मां...ममता का वो सागर है, जिसमें हर भावनाएं समाई हुई है... शायद इसलिए तो कहा जाता है अगर धरती पर कहीं भगवान को देखना है, तो मां को देख लो।
यूं तो मां की ममता पर कई शायरों ने अपनी कलम का जादू बिखेरा है, लेकिन एक शायर और लेखक ऐसे हैं जिन्होंने अपनी कलम से मां की ममता को पन्नों पर उतार दिया है। वो कोई और नहीं बल्कि उर्दू साहित्यकार मुनव्वर राना है, जो कहते हैं “मैं माशूका से नहीं बल्कि अपनी मां से मोहब्बत करता हूं”।
मुनव्वर राना की सबसे ज्यादा पढ़ी और पसंद की जाने वाली रचना है ‘मां’, जिसमें उन्होंने मां की ममता को शब्दों में पिरोकर कागज पर उतार दिये हैं-
पेश है मदर्स डे स्पेशल मुनव्वर राना के कुछ बेहतरीन शेर-
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