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कई बार हम सभी के ऐसा होता है कि हमें घर में या तो खाना बनाने का मन नहीं करता या फिर घर का खाना नहीं खाना होता। ऐसे में लोग बाहर जाकर कुछ अच्छा खाने की सोचते हैं, ताकि इससे उनका स्वाद भी थोड़ा बदल जाए और उन्हें घर पर कोई मेहनत भी न करनी पड़ी। अपना पसंदीदा खाने का सेवन करने के बाद कई बार तो आप इसके टेस्ट और खुश होकर होटल के वेटर को टिप के तौर पर कुछ पैसे ज्यादा भी दे आते हैं और आपको बुरा भी नहीं लगता। क्योंकि आप अपने खाने से पूरी तरह से संतुष्ट हैं।
लेकिन वहीं दूसरी ओर, क्या हो जब आपको बहुत भूख लगी है और आपने जो खाना ऑर्डर किया वह खाने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। इसकी वजह से आपका मूड तो खराब होता ही है, साथ ही आपका पेट भी नहीं भरता। और तो और आपको दुखी मन से इसका बिल भी चुकाना पड़ता है। क्योंकि खाना तो आपने ऑर्डर किया ही है, फिर चाहे उसे खाया हो या नहीं। ऐसे में आप सोचते होंगे कि कुछ ऐसा हो जाए कि मुझे इस घटिया खाने का बिल न देना पड़े।
हालांकि अब आपको बता दें कि, डेनमार्क में खाने को लेकर भी एक तरह का कानून तैयार किया गया है। दरअसल कहा जाता है कि अगर आप डेनमार्क के किसी भी रेस्टोरेंट में खाना खा रहे हैं और आपको यह पसंद नहीं आया या फिर खाना खाने से आपको संतुष्टि नहीं मिली तो आपको इसका बिल देने की कोई जरूरत नहीं है। यहां तक कि इस तरह के खाने का बिल चुकाने के लिए कोई आप पर दबाव भी नहीं डाल सकता।
गौरतलब है कि, डेनमार्क के खाने की बात करें तो यह बाकी देशों के मुकाबले काफी महंगा है। यहां के खाने को लोग काफी पसंद भी करते हैं। लेकिन आपको जानकारी हैरानी होगी कि यहां पर अगर आप किसी रेस्टोरेंट में नल का पानी भी लेते हैं तो इसके लिए भी आपको पैसे देने होते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि कहा जाता है कि इस पानी में एक मिनरल बोतल से भी ज्यादा मिनरल्स पाए जाते हैं। जिसके लिए रेस्टोरेंट के मालिक को यह पानी सरकार से खरीदना पड़ता है।
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