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हमारे देश में पूजा पाठ की बड़ी महिमा है। हर रोज हिन्दू धर्म में लोग देवी देवताओं को पूजते हैं। जहां सोमवार को शिव जी, मंगल को हनुमान जी तो बुधवार को गणेश जी, गुरुवार को विष्णु जी, शुक्र को मां लक्ष्मी जी, शनि को शनि देव जी एवं रविवार को भगवान् भास्कर की पूजा की जाती है। आज हम आपको गुरुवार को समर्पित भगवान् विष्णु जी की पूजा की विधि बताने जा रहे हैं।
जानें कैसे करना चाहिए पूजा
बृहस्पतिवार के दिन सुबह उठने के बाद स्नान करें। उसके बाद केला पेड़ के नीचे व्रत संकल्प लें। केले के पौधे को पीले कपड़े पहनाएं। उसके बाद पीले प्रसाद रखें। जैसे चना की दाल, गुड़, किसमिस आदि। एक प्लेट में दीप-अगरबत्ती जला के रखें।
सबसे पहले विष्णु जी को जल का अर्घ्य दें। उसके बाद उन्हें पीले पुष्प समर्पित करें। फिर कुमकुम का तिलक लगाएं, उससे विष्णु जी प्रसन्न होते हैं। उसके बाद विष्णु जी की व्रत कथा करें।
ऐसा कहा जाता है कि व्रत कथा से विष्णु जी बहुत प्रसन्न होते हैं, और जो कोई इस कथा को सुनाता और सुनता है उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। बृहस्पतिवार के दिन गाय का दूध के चरणामृत बनाके विष्णु जी की भोग लगाना चाहिए। फिर आरती करें। इसके बाद भगवान् विष्णु से अच्छा घर और वर के लिए प्रार्थना करें। दिन भर उपवास रखें। संध्या में आरती अर्चना के बाद फलाहार करें।
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