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पैसे लेकर चंपत हो जाने वाले चूने की नहीं बल्कि हम पान में लगा कर खाने वाले चूने की बात कर रहे हैं। जी हां वह चूना जो पान में ज्यादा लग जाए तो मुह को काट देता है यही चूना यदि इंसान अपने जख्मों पर लगा दे तो वह इसे ठीक भी कर देता है। चूना एंटीआक्सीडेंट एंटी बायोटिक का काम करता है।
अगर आप को रास्ते मे कहीं चोट लग जाए और खून बहने लगे तो बिना देर किये किसी पान की दुकान से चूना लेकर उसे अपने जख्म पर मल लेना चाहिए। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि खून बह रहा होगा तो वह रूक जाएगा और एंटी बायोटिक का भी काम करेगा। हां बस एक चीज का ख्याल रखना होगा कि चूना लगने के बाद होने वाले दर्द को बर्दाश्त करना होगा।
ज्यादातर ऐसे केसेज में व्यक्ति घाव को खुला छोड़ देता है और डिटाल आदि के प्रबंध में लग जाता है। जबकि उसे तुंरत घाव को कवर करने के साथ साथ एंटी बायोटिक लगाना चाहिए। पुराने जमाने से चूने को इस रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। आज का चूना कई मायनों में पहले के चूने से ज्यादा सेफ है।
इसलिए बिना किसी हिचक के चोट घाव में चूने का इस्तेमाल करना चाहिए। चूना लगाने का एक और बड़ा फायदा यह है कि चोट ठीक होने के बाद चोट के स्थान पर कोई धब्बा आदि भी नहीं पड़ता और त्वाचा पहले जैसी चिकनी और साफ सुथरी बनी रहती है।
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