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हम जब भी किसी होटल में जाते हैं तो सबसे पहले यहां कि सर्विस, साफ सफाई और खाने के टेस्ट पर ध्यान देते हैं। कई ऐसी जगहों पर भी अपने कभी न कभी तो खाना खाया होगा, जहां पर आपको इसका टेस्ट नहीं पसंद आया फिर भी बिल देना पड़ा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे रोस्टोरेंट के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने आप में ही बेहद खास है। यहां अगर आपका मन करे तो पैसे दीजिए वरना बिना बिल दिए भी जा सकते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, यहां पर किसी भी डिश का कोई रेट नहीं है।
यह एक ऐसा होटल है जहां पैसे से ज्यादा प्यार को अहमियत दी जाती है। दरअसल यहां हम केरल के एक अनोखे होटल की बात कर रहे हैं। जिसे यशोदाममा नाम की एक 61 वर्षीय बुजुर्ग महिला चलाती है। पति की बाद उसने अपना यह होटल चलाना शुरू किया, जिसे 12 साल हो चुके हैं। हैरानी की बात तो यह है कि वह अकेले ही यहां पर सारा काम करती हैं। उनके इस होटल में न तो कोई वेटर या हेल्पर और ही कोई कैश काउंटर बना हुआ है। खाना खाने के बाद जब पैसे पूछे जाते हैं, तो वह सभी से यही कहती हैं कि जितना मन करे उतना दे दीजिए।
वह कहती हैं कि यहां किसी भी चीज का कोई फिक्स रेट नहीं है। लोगों को जितना खाना पसंद आया हो वह उतना ही पैसा देकर जा सकते हैं। बता दें कि, वह रोज इतना खाना बनाती हैं जो 50 लोगों का पेट आराम से भर सकता है। हालांकि इनके इस होटल में एक बार में सिर्फ 10 लोग बैठकर ही खाना खा सकते हैं। इसके बावजदू उनका यह होटल और यशोदममा के हाथों का स्वाद चखने के लिए यहां लंबी लाइने लगी रहती हैं।
यहां लोग दूर-दूर से सिर्फ इस स्वादिष्ट खाने के लिए पहुंचते हैं। इस होटल में वह रोज फिश करी, थोरम, फ्राइड फिश, चावल, टैपिओका जैसी कुछ चीजे बनाती हैं। यशोदममा कहती हैं कि, अगर वह बहुत अमीर होती तो हर दिन एक वक्त का सभी को फ्री में खिलाती। उनका कहना है कि, 12 साल जब उनके पति का देहांत हो गया तो उनके पास कोई आसरा नहीं था। वह स्कूल में टीचर हुआ करती थी। यहां के कुछ स्टूडेंट्स ने उन्हें इस अनोखे होटल को चलाने का आइडिया दिया था।
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