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गुजरे जमाने से कुछ ऐसी चीजे हैं, जिनकों केवल औरतों का सामान कहा जाता है। वो चाहे पिंक (गुलाबी) कलर हो या हाई हील्स। लेकिन क्या आप जानते हैं महिलाओं के नारीत्व और व्यक्तित्व का अहम हिस्सा मानी जाने वाली कई चीजें उनके लिए बनी ही नहीं थी। गुलाबी रंग और हील्स उन्हीं में से एक है। आपको जानकर हैरानी होगी कि आज के समय में महिलाओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई चीजों का अविष्कार पुरुषों के इस्तेमाल के लिए किया गया था। गुलाबी रंग और हील्स तो फिर भी आम बात है... नीचे दी गई लिस्ट को पढ़कर आप यकीनन दंग रह जाने वाले हैं।
आइए जानते हैं क्या-क्या चीजें महिलाओं के लिए नहीं बल्कि पुरुषों के लिए बनाई गई थी और क्यों?
पिंक कलर
आपको जानकर हैरानी होगी कि आज के समय में जिस पिंक रंग को लड़कियों का रंग कहा जाता है, इतिहास में पहले इसे पुरुषत्व का प्रतिक माना जाता था। पिंक रंग... लाल और सफेद रंग को मिलाकर बनाया जाता है। लाल रंग शक्ति और ताकत का प्रतीक होता है और सफेद रंग सुख-समृद्धि का। पिंक रंग में ताकत व शांति और सुख समृद्धि जैसे गुण सम्मिलित होते हैं। अगर आप पुराने रोमन सैनिकों को देखेंगे तो उनके हेल्मेट पर गुलाबी रंग की कलगी लगी होती थी, यहां तक कि कई का ड्रेसअप भी पिंक रंग का होता था।
हाई हील्स
कहा जाता है कि फारसी आर्मी के योद्धा घोड़े पर चढ़ने के लिए हाई हील्स का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा फ्रांस के लूईस चौंदवे का भी जिक्र यहां किया जाएगा। कहा जाता है कि वह एक महान शासक थे, लेकिन उनकी लम्बाई 5 फुट चार इंच थी। अपनी लम्बाई को बढ़वाने के लिए उन्होंने 10 इंच हील के जूते बनवाए और अपनी कमी को पूरा किया।
सैनेटरी नैपकिन
पैडमैन फिल्म से पहले भारत में कोई आदमी शायद ही सैनेटरी पैड्स/नैपकिन की बात करता होगा। आदमी तो छोड़िए खुद औरते भी दबी जुबान में इसकी बात किया करती थीं। लेकिन अब लोग धीरे-धीरे इस बारे में बात कर रहे हैं। हालांकि, यहां आपको बता दें कि जिस सैनेटरी नैपकिन को सुनकर आप नाक-भौं सिकोड़ने लग जाते हैं, असल में उसे महिलाओं के लिए नहीं बल्कि पुरुषों के लिए बनाया गया था। जी हां, प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान फ्रांस की नर्सो ने घायल सैनिकों की एक्सेसिव ब्लीडिंग को रोकने के लिए पहली बार पैड का इस्तेमाल किया था।
थॉन्ग्स
सबसे पहले थॉन्ग्स का निर्माण पुरुषों के इस्तेमाल के लिए किया गया था। इसका उद्देश्य पुरुषों के जननांगों की रक्षा करना और उन्हें सपोर्ट करना होता था। लेकिन बाद में महिलाओं द्वारा इनका इस्तेमाल किया जाने लगा।
ईयररिंग्स
वैसे तो हिंदू समाज में भी कान छिदवाने का प्रचलन बेहद पुराना है, लेकिन ईयररिंग सबसे पहले पर्सेपोलिस, फारसी पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला गहना था। फारसी सौनिकों के कान में सबसे पहले ईयररिंग्स नजर आए थे।
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