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शिवा हैदराबाद में रहते हैं, जो बीते पन्द्रह सालों से निःस्वार्थ इस शहर की सुप्रसिद्ध हुसैन सागर झील और उसके आसपास के इलाकों में आत्महत्या करने की कोशिश करने वाले लोगों की जान बचाने का काम करता हैं। इसके लिए शिवा किसी तरह की कोई भी फीस नहीं लेते हैं। यानी कि वह फीस तबी लेंगे, जब किसी के आदेश का वह पालन करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं है, शिवा ख़ुद की मानवता के नाते ही ऐसा करते हैं। इस तरह शिवा की कोई नौकरी नहीं है। त्यौहारों पर हुसैन सागर झील में जो प्रतिमाएँ आदि वसर्जित की जाती हैं, उनमें से लोहा और दूसरे धातु निकालकर शिवा उन्हें बेच लेता है और कुछ पैसों का जुगाड़ कर अपना पेट पालता है।
हालांकि कभी-कभी पुलिस विभाग भी शिवा की कुछ आर्थिक मदद कर देता है, लेकिन इसके एवज में वह उससे सहायता भी लेती है। जैसे कि कभी-कभी वह देर शाम या रात को झील में किसी शव के होने की सूचना शिवा को देते हैं और शिवा झील से लाश को निकालकर पुलिस की मदद कर देता है। अभी तक शिवा ने हुसैन सागर झील से लगभग एक हज़ार से ज़्यादा लाशों को निकालने का काम किया है। दिलचस्प है कि शिवा उन लाशों का अंतिम संस्कार भी कर देते हैं, जिनके कोई रिश्तेदार नहीं मिलते।
शिवा के इस काम में कूदने के पीछा का जुनून काफी रोमांचक है। वह बताते हैं कि “मैं बचपन में एक भीड़ में खो गया था, तो मुझे सड़क पर भीख माँगनी पड़ी। एक दिन एक महिला मुझे अपने साथ घर बुला लेकर चली आयी और कहा कि आज से तुम मेरे बेटे हो। उनका एक बेटा पहले से था। एक दिन हुसैन सागर झील में मेरा वह भाई किसी अनजान इंसान को बचाने के लिए झील में कूद गया था, जिसके बाद दोनों वापस नहीं मिले। अपने भाई के साथ हुयी इस घटना के बाद ही मैंने तय कर लिया कि हुसैन सागर झील पर अब मैं किसी को मरने नहीं दूँगा।”
Author: Amit Rajpoot
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