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17वीं लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल के नतीजों सामने आने लगें हैं और इन एग्जिट पोल के नतीजों के आधार पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चली हैं। वैसे तो हर वो शख्स जो देख की राजनीति की जानकारी और रूचि रखता है, वो एग्जिट पोल से भलिभांति परिचित होता है, पर वहीं कुछ लोग ऐसे भी हीं जिन्हे इस बात की जानकारी नहीं होती है कि आखिर एग्जिट पोल होता क्या है? चुनाव के नतीजों के बारे में मतगणना से पहले ही कैसे अनुमान लगाया जाता है? अगर आपके मन में भी इस वक्त ऐसे ही सवाल चल रहे हैं, तो हम आपके इन सवालों का जवाब लेकर आए हैं। चलिए जानते हैं कि आखिर ये एग्जिट पोल हैं क्या, जिसका चर्चा आजकल हर जुबान पर है।
दरअसल, एग्जिट पोल एक तरह का चुनावी सर्वे हैं जो कि चुनाव के दौरान न्यूज चैनल्स और न्यूज एजेंसिया करवाती हैं। ये सर्वे मतदान के साथ-साथ ही होता है, असल में इसमें हर चैन्लस और न्यूज एजेंसी के प्रतिनिधि पोलिंग बूथ पर मौजूद होते हैं और जैसे ही कोई वोटर मतदान कर बाहर निकलता है, उससे उसकी कुछ निजी जानकारियों के साथ ही उसके मत के बारे में पूछा जाता है कि आपने किस पार्टी को वोट दिया है।
वैसे ये सवाल-जवाब हर वोटर से नहीं किए जाते बल्कि इसमें कुछ ही लोग शामिल होते हैं और फिर इस सर्वे में लोगों के मत रुझान के आधार पर एग्जिट पोल के नतीजे सबसे आखिरी चरण के मतदान के बाद घोषित किए जाते हैं।
जी हां, एग्जिट पोल के नतीजे चुनाव के बीच में घोषित नहीं किए जा सकते हैं, क्योंकि इससे बाकी चरणों के वोटिंग पर असल पर पड़ सकता है। इसलिए सबसे आखिर में इसके नतीजे सामने आते हैं। इस तरह से काउंटिंग से ठीक पहले चुनाव के नतीजों के बारे में एग्जिट पोल के जरिए अनुमान लगाया जाता है, कि देश का जनादेश क्या कह रहा है और किस पार्टी को बढ़त मिल रही है।
बात करें एग्जिट पोल की शुरूआत की तो मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सबसे पहले नीदरलैंड में 15 फरवरी 1967 में एग्जिट पोल चलन में सामने आया था, जिसे भारत समेत दूसरें देशों ने भी अपनाया। वहीं भारत में 1998 में चुनाव आयोग के द्वारा एग्जिट पोल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया था। हालांकि लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एग्जिट पोल ये ये प्रतिबंधन हटा दिया। वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव के कुछ दिनों पहले भी देश में एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने की मांग ने जोर पकड़ी थी। पर तभी एग्जिट पोल पर एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने की बजाए इसके कानून में संशोधन कर नियम बना दिया गया कि अंतिम चरण के वोटिंग के बाद ही एग्जिट पोल के नतीजे सामने लाए जाएंगे और तभी से अंतिम चरण की वोटिंग होने होने के बाद ही एग्जिट पोल के नतीजों की घोषणा की जाती है।
Author: Yashodhara Virodai
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