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आज बहुत से लोग बेचैन रहते हैं। वे सोचते हैं कि यार हमारे पास क्या नहीं है और इसी को सोचकर वे बेचैन रहते हैं। दिलचस्प है कि ये बातें अमीर और ग़रीब दोनों पर ही लागू होती हैं। अमीर का मन बेचैन है तो ग़रीब का मन भी उससे कम बेचैन नहीं है। ग़ौरतलब है कि ये सभी लोगों पर समान रूप से लागू होता है। बेचैनी के मामले में कोई भी किसी से कम नहीं है। ऐसे में आइए आज हम बेचैन रहने वालों के लिए गीता का वो अद्भुत ज्ञान बता दें जिससे कि उनके मन को शान्ति मिले और फिर धीरे-धीरे वो महान हो जाएँ।
आपको बता दें कि बेचैन रहने वालों को उनके मन पर काबू पाने के लिए श्रीमद् भगवत् गीता के दूसरे अध्याय के 55वें श्लोक में विशेष तरीक़े से वर्णन मिलता है। इसमें भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे अर्जुन! तमाम इच्छाओं के पीछे भागने वाले इंसान का मन बहुत ही बेचैन होता है। वे अपने आसपास ध्यान नहीं देते हैं बल्कि उनकी इच्छा उनके मन के साथ भटकती ही रहती है। ऐसे में जब कोई व्.क्ति अपनी इच्छाओं को त्यागकर अपने मन में ही संतुष्ट रहता है, उसी को हम स्थिर बुद्धि वाला समझते हैं। बाक़ी लोगों का मन तो चंचल होता है और इधर-उधर भटकता रहता है।
श्रीकष्ण आगे कहते हैं कि स्वार्थी होकर इच्छाओं के पीछे भागने से हर इंसान का मन बेचैन ही रहता है, क्योंकि इंसानों की इच्छाएँ तो उनके मरते दम तक कभी पूरी ही नहीं होती हैं। एक इच्छा पूरी होने पर दूसरी इच्छा पूरी करने का मन होता है। ऐसे में मन कभी भी संतुष्ट नहीं होता है और भटकता रहता है। इसलिए बेचैनी को दूर करने के लिए आपको अपने मन की इच्छाओं को दूर करना होगा। इसके लिए आपको हर तरह की सादगी का सहारा लेना चाहिए।
Author: Amit Rajpoot
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