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लोकसभा चुनाव 2019 की गिनती शुरू हो चुकी और गुरुवार 23 मई की दोपहर तक ही नतीजों में इस बात का फैसला हो जाएगा कि इस बार किसकी सरकार आने वाली है। आज पूरा भारत सिर्फ इसी बात को जानने का इंतजार कर रहा है कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन बनने वाला है। लेकिन इसके लिए सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जाएगी, इसके बाद EVM में दर्ज वोटों को गिना जाएगा। इस बार के चुनावों में 12 लाख से भी ज्यादा EVM का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में आज हम आपको EVM से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके बारे में शायद ही किसी को कोई खास जानकारी होगी।
इससे पहले आपको बता दें कि, देश में सबसे पहले आम चुनाव 1952 में हुए थे। लेकिन इसके 30 साल के बाद 1982 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का पहली बार इस्तेमाल किया जाना शुरू हुआ। इसे सबसे पहले केरल चुनाव में एक पोलिंग बूथ पर लगाया गया था। इसके बाद जब 1998 और 2001 में चुनाव हुए इस दौरान भी कुछ ही फेज में EVM का इस्तेमाल हुआ था।
लेकिन इसके बाद जब 2004 में चुनाव हुए उसमें हर जगह पर सिर्फ EVM ही नजर आई और आज भी इसी के माध्यम से वोटिंग की जाती है। हालांकि इससे पहले वोट करने का इस अलग ही तरीका हुआ करता था। दरअसल, पहले बैलैट पेपर पर ठप्पा लगाकर वोटिंग की जाती थी। 80 और 90 के दशक में इसी तरह से चुनाव किए जाते थे। इन बैलेट पेपर पर पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह छपा होता था। चुनाव के दिन मतदाता अपने इच्छानुसार किसी भी पार्टी के चुनाव चिन्ह के आगे ठप्पा लगा देते थे। इसके बाद पेपर को अच्छी तरह से फोल्ड करके वहां रखें बैलेट बॉक्स में डाल डाल दिया जाता था।
बैलेट बॉक्स के साथ होती ये समस्याएं
जैसे ही वोटिंग पूरी होती थी इस बैलेट बॉक्स को सील बंद करके स्ट्रांग रूम में रख दिया जाता था। लेकिन इस प्रक्रिया पैसे, कर्मचारी और मेहनत ज्यादा लगती थी। इसके बैलेट बॉक्स की सुरक्षा को लेकर भी एक बड़ा सवाल बना रहता था। क्योंकि कई बार मचदाताओं को धमकाकर वोट डालने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी थी। इन्हीं कुछ समस्याओं से निपटने के लिए बैलेट पेपर को ही बंद करने का फैसला किया गया।
पोस्टल बैलेट क्या है
जैसा कि इसके नाम से ही अंदाजा लगाया जा सकता है। पोस्ट का अर्थ है डाक इसकी मतलब डाक के द्वारा भेजे जाने वाले बैलेट पेपर। हालांकि इनकी संख्या काफी कम होती है। इसलिए सबसे इन्हीं की गिनती की जाती है, ताकि एक काम जल्द से जल्द खत्म हो सके। यह सुविधा खासतौर पर बोर्डर पर तैनात देश की रक्षा करने वाले जवानों के लिए बनाई गई है। इनके अलावा चुनावी ड्यूटी में लगे लोग भी इसके जरिए वोट कर सकते हैं। साफ शब्दों में कहा जाए तो यह उन लोगों के लिए हैं जो चुनावी दायरे से दूरी पर हैं।
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