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आमतौर पर माना जाता है कि धूप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाना चाहिए, क्योंकि ये सूरज की परबैंगनी किरणों से हमारी त्वचा की सुरक्षा करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि सिर्फ धूप में ही नहीं बल्कि घर में भी आपको सनस्क्रीन की जरूरत पड़ती है। जी हां, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो घर के अंदर भी हम कई तरह की हानिकारक किरणों के सम्पर्क में रहते हैं, जिसके चलते हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है। आज हम आपको इसी बारे में बता रहे हैं कि आखिरकार किस तरह से हम घर के अंदर भी हानिकारक किरणों के सम्पर्क रहते हैं।
दरअसल आज के टेक्‍नोलॉजी के जमाने में हम 24 घंटे तकनीकि उपकिरणों से घिरे हुए हैं, सुबह उठने के साथ ही और सोने के समय तक हम मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट का उपयोग करते हैं। ऐसे में हम 24 घंटे हम इस तरह के उपकरणों से निकलने वाली हानिकारक विकिरणों के सम्पर्क में रहते हैं, जिसका दुष्प्रभाव हमारी त्वचा पर पड़ सकता है।
गौर करने वाली बात ये है कि तकनीकि उपकरणों से निकलने वाले तरंगे, पराबैंगनी किरणों की तुलना में त्वचा की गहराई में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं, जिससे स्किन को नुकसान पहुंचने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसके चलते झुर्रियां, स्किन ढीली पड़ जाना और हाइपरपिगमेंटेशन जैसी स्किन समस्याएं हो सकती हैं।
यही वजह है कि स्किन विशेषज्ञ मानते हैं कि घर और बाहर आपको हर जगह पर सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए। ताकि ऐसी विकरणों से बचा जा सके । अब सवाल ये है कि इसके लिए किस तरह की सनस्‍क्रीन का उपयोग करना चाहिए। तो त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार एलोवेरा युक्त और कैयोलिन क्ले वाले सनस्क्रीन स्किन के लिए बेहतर होते हैं। सनस्क्रीन के इस्तेमाल के साथ ही स्किन की सफाई भी बेहद जरूरी है, इसलिए स्किन स्पेशलिस्ट की माने तो हर तीन-चार घंटे पर स्किन को साफ कर दोबारा से सनस्क्रीन लगाना चाहिए।
Author: Yashodhara Virodai
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