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पं. जवाहर लाल नेहरू ने बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध के द्वारा प्रतिपादित पञ्चशील सिद्धान्तों (जिन्हें बौद्ध धर्म की मूल आचार संहिता माना जाता है) का अनुसरण करते हुए राजनैतिक पञ्चशील सिद्धान्तों का मार्ग दुनियाभर के लिए प्रशस्त किया। यह वास्तव में मानव कल्याण तथा विश्वशांति के आदर्शों की स्थापना के लिए विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था वाले देशों में पारस्परिक सहयोग के पाँच आधारभूत सिद्धांतों का समूह है, जिन्हें हम पंचसूत्र अथवा पंचशील कहते हैं। नेहरू के इन्हीं पञ्चशील के सिद्धान्तों को पूरी दुनिया ने स्वीकारा और नेहरू को राजनीति का बुद्ध होने की संज्ञा प्रदान कर दी।
आपको बता दें कि नेहरू के पञ्चशील सिद्धांत को भारत-चीन रिश्तों का आधार माना जाता है, जिस पर 29 अप्रैल, 1954 को दोनों देशों ने हस्ताक्षर किये थे। ग़ौरतलब है कि पञ्चशील सिद्धांत पर समझौता मूलतः चीन के क्षेत्र तिब्बत और भारत के बीच व्यापार और आपसी संबंधों को लेकर हुआ था, जिसके बाद हिन्दी-चीनी भाई-भाई के नारे लगे थे और हिन्दुस्तान ने दुनिया की महान ताक़तों की आँखों में आँखें डालकर गुट निरपेक्षता का रवैया अपनाया था।
दिलचस्प है आगे जाकर दुनिया के अलग-अलग देशों ने अपने-अपने हितों में लिये पञ्चशील सिद्धांत पर आस्था टिकाई थी और उन्हें अपनाया था। इस प्रकार नेहरू का पञ्चशील सिद्धांत एकात्म मानववादी और जन कल्याण करने वाला है। राजनीति में ऐसा दुर्लभ होता है. इसीलिए उन्हें राजनीति का बुद्ध कहा जाता है।
बुद्ध धर्म के पञ्चशील सिद्धांतः
वास्तव में पञ्चशील बौद्ध धर्म की मूल आचार संहिता है, जिसको थेरवाद बौद्ध उपासक व उपासिकाओं दोनों के लिए पालन करना आवश्यक माना गया है। इन सिद्धान्तों को मूल रूप से पालि भाषा में लिखा गया है, जो जिस प्रकार हैं-
(1) पाणातिपाता वेरमणी-सिक्खापदं समादयामि।। अर्थात् हिंसा न करना।
(2) अदिन्नादाना वेरमणी- सिक्खापदं समादयामि।। अर्थात् चोरी न करना।
(3) कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी- सिक्खापदं समादयामि।। अर्थात् व्यभिचार न करना।
(4) मुसावादा वेरमणी- सिक्खापदं समादयामि।। अर्थात् झूठ न बोलना।
(5) सुरा-मेरय-मज्ज-पमादठ्ठाना वेरमणी- सिक्खापदं समादयामि।। अर्थात् नशा न करना।
नेहरू के पञ्चशील सिद्धांतः
(1) सभी देशों द्वारा अन्य देशों की क्षेत्रीय अखंडता और प्रभुसत्ता का सम्मान करना।
(2) दूसरे देश के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
(3) दूसरे देश पर आक्रमण न करना।
(4) परस्पर सहयोग एवं लाभ को बढ़ावा देना।
(5) शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति का पालन करना।
Author: Amit Rajpoot
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