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सावरकर का नाम आज हिन्दुत्व की पहचान है। जी हाँ, वीर सावरकर ही वह पहले विद्वान लेखक थे, जिन्होंने हिन्दुत्व को परिभाषित किया और लिखा-
आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत
भूमिका पितृभूः पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः।
अर्थात् समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभू है, जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुये हैं और जिनकी यही पुण्य भू है, जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है।
चूँकि वीर सावरकर ने पहली बार हिन्दुत्व को परिभाषित किया था, इसलिए वह आज भी हिन्दुओं के एक सशक्त नेता के रूप में और रोल मॉडल के रूप में जाने जाते हैं। हिन्दुत्व के प्रति उनकी सशक्त और मज़बूत विचारशैली ने ही उन्हें एक मुकाम दिया।
आपको बता दें कि वीर सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था, जिनका जन्म 28 मई, 1883 को ब्रिटिश भारत के बंबई प्रांत के ज़िला नासिक ग्राम भागुर में हुआ था। यद्यपि वीर सावरकर की प्रसिद्धि का कारण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और हिन्दुत्व रहा. तथापि इनकी धार्मिक मान्यता एक हिन्दू नास्तिक की रही।
ग़ौरतलब है कि सावरकर भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन की अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्हें प्रायः स्वातंत्र्यवीर या वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है। हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा यानी कि हिन्दुत्व को विकसित करने का बहुत बडा श्रेय सावरकर को जाता है।
वास्तव में सावरकर को उनके तेवरों के लिए भी ख़ूब याद किया जाता है। ऐसा उनके अनेक क़िस्से हैं। यह भी जानना दिलचस्प होगा कि वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी देशभक्त थए, जिन्होंने साल 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु की मृत्यु पर नासिक में हो रही एक शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी है, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन की संसद में शोक सभा हुयी है? वास्तव में कुछ ऐसे थे वीर सावरकर के तेवर, जिन्हें आज हम उनकी जयंती पर याद कर रहे हैं।
Author: Amit Rajpoot
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