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मासिक धर्म यानी पीरियड महिलाओं की सामान्य शारीरिक अवस्था है, लेकिन फिर भी हमारे समाज में अभी तक ये एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करना चाहते हैं। जबकि इसी वजह से बहुत सी किशोर बच्चियां और महिलाएं जागरूकता के अभाव में स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार होती हैं और हर साल इसके चलते कई जाने भी जाती हैं। ऐसे में मासिक धर्म के प्रति महिलाओं को जागरूक करने के लिए 28 मई को हर साल विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है।
जी हां, आज दुनिया भर में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जा रहा है और इसी सिलसिले में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लेकिन सवाल ये है कि इस तरह के कार्यक्रम का क्या वास्तव में जमीनी स्तर पर कारगर होते हैं, क्योंकि महिलाओं की जो आबादी वास्तव में ऐसी समस्याओं से पीड़ित है वो तो अनपढ़ है, उनके पास जानकारी के साथ ही संसाधनो की भी कमी है।
बात करें एनएएफएचएस 2015-16 की रिपोर्ट की तो, इसके अनुसार देश में लगभग 58 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग कर पाती हैं। बाकी महिलाएं अभी माहवारी प्रबंधन की सामग्री को धोकर दोबारा से उपयोग करती हैं।
संसाधनो की कमी के अलावा इस दिशा में सबसे बड़ी समस्या है हमारी सामाजिक सोच और पुरानी विचारधारा। दरअसल, हमारे समाज का एक बड़ा तबका अभी मासिक धर्म को एक सामान्य शारीरिक प्रकिया ना मानकर इसे स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखता है। ऐसे में घरों में लड़कियों से स्वच्छता और रख-रखाव पर बात करने की बजाए उन पर बेवजह की रोक-टोक लगाई जाती है, जैसे कि पीरियड्स के दौरान मंदिर नहीं जाना चाहिए, अचार नहीं छुना चाहिए जैसी बातें अक्सर घरों होती है। ऐसे में अगर वास्तव में इस दिशा में बेहतर परिणाम पाने हैं तो आपको सबसे पहले तो ऐसे टैबू पर रोग लगानी होगी। इसके साथ ही ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में माहवारी प्रबंधन सामग्री उपलब्ध करानी होगी।
Author: Yashodhara Virodai
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