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वैसे तो भारत में बहुत सी मिठाईयां बनती हैं, पर इन सबमें सबसे खास है जलेबी। जलेबी का नाम सुनते ही बहुतों के मुंह में पानी आ जाता हैं और हम भारतीयों को तो जलेबी से इस क़दर प्यार है हम इसे राष्ट्रीय मिठाई तक कहने में गुरेज नहीं करतें। पर क्या आप ये जानते हैं कि जलेबी भारतीय मिठाई नहीं बल्कि विदेशी है। जी हां, आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं कि आखिर जलेबी भारत कैसे आई।
दरअसल, जलेबी भारत की नहीं बल्कि पर्शिया की देन है। इतिहासकारों की माने तो जलेबी पर्शियन जुबान वाले तुर्की आक्रमणकारियों के साथ भारत में पहुंची थीं। ऐसे में ये कह सकते हैं कि भारत में जलेबी का इतिहास 500 साल पुराना है। एंग्लो इंडियन डिक्शनरी हॉब्सन-जॉब्सन के अनुसार जलेबी अरेबिक शब्द 'जलाबिया' से आया है। वहीं मध्यकालीन पुस्तक 'किताब-अल-तबीक़' में भी 'जलाबिया' नाम की एक मिठाई का उल्लेख मिलता है, जिसका उद्भव पश्चिम एशिया में बताया गया था। वैसे सालों पहले ईजाद की गई ये मिठाई बीते सैकड़ों सालों में काफी परिवर्तित हुई और अलग –अलग देश और क्षेत्रों में ये अलग-अलग तरह से बनाई जाती है।
जैसे कि लेबनान में जलेबी 'जेलाबिया' नाम की पेस्ट्री के रूप में मिलती है, जो की आकार में लंबी होती है। वहीं अफ़ग़ानिस्तान में जलेबी खास तौर पर मछली के साथ सर्व की जाती है। वहीं श्रीलंका में जलेबी का एक लग ही प्रकार 'पानी वलालु' पाया जाता है जो कि उड़द और चावल के आटे से बनाया जाता है। जबकि नेपाल की मिठाई जेरी भी जलेबी का ही एक रूप है।
वहीं भारत के अलग-अलग राज्यों में भी जलेबी अलग-अलग रूप में मिलती है, जैसे कि इंदौर में जहां 300 ग्राम वज़नी 'जलेबा' बनाई जाती है। वहीं बंगाल में दूध और मावा के साथ मिलाकर खास तौर पर मावा जलेबी तैयार की जाती है।
Author: Yashodhara Virodai
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