Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
देश-दुनिया घूमने के शौकीन लोगों के लिस्ट में गोवा का नाम जरूर शुमार होता है, जहां नीले आसमान के तले दूर तक फैले रेत और समुद्र तट का मनोहर नजारा देखने लायक होता है। ऐसे में मस्ती और उमंग-उल्लास से भरे गोआ हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यही वजह है कि देश-विदेश के लोग शांति और सुकून के दो पल जीने को गोवा आते हैं। ऐसे में गोवा भारत के आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में खास स्थान रखता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोवा पहले भारत नहीं पुर्तगाल का हिस्सा हुआ करता था, बल्कि 30 मई, 1987 के दिन गोवा को भारत के पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। ऐसे में आज गोवा के स्थापना दिवस के अवसर पर हम आपको गोवा के भारत का हिस्सा बनने की कहानी और इसका इतिहास बताने जा रहे हैं।
इतिहास में गोवा का अस्तित्व तीसरी सदी इसा पूर्व से शुरू होता है, जब यहां पर मौर्य वंश का शासन हुआ करता थी। पर इसके बाद यहां से यहां मुगलो से लेकर पुर्तगालियों कई सारी बाहरी शासकों ना राज रहा है। बात करें पुर्तगालियो की तो गोवा में सत्तारुढ़ बीजापुर के सुल्तान यूसुफ़ आदिल शाह को पराजित कर यहां स्थायी राज्य की नीव रखी। ये गोवा में पुर्तगाली शासन की शुरूआत थी जो कि 1961 तक तक़रीबन चार सदियों तक चला।
दरअसल, 1947 में जब भारत ब्रिटिश सरकार की गुलामी से आज़ाद हुआ तो फिर भारत की तत्कालीन सरकार ने पुर्तगाली प्रांतो से भारतीय उपमहाद्वीप को भारत को सौपने की मांग की। पर तभी पुर्तगाल ने इस पर बातचीत करने से इंकार कर दिया। ऐसे में19 दिसंबर 1961 को तत्कालीन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विजय नामक सैन्य ऑपरेशन के जरिए भारतीय सेना ने गोवा पर आक्रमण उस पर उसे भारतीय संघ में शामिल कर दिया।
इसके बाद दमन एवं द्वीप के साथ गोवा भारतीय संघ के केंद्रशासित राज्यो में शामिल हो गई। वहीं 30 मई 1987 को गोवा को भारत का 26वें राज्य का दर्जा मिल गया।
Author: Yashodhara Virodai
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.