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किंजल शाह गुजरात के अहमदाबाद शहर की रहने वाली हैं। ये जब अपने स्नातक की पढ़ी कर रही थीं तब इनके कुछ दोस्त वीकेंड में झुग्गियों में जाकर ग़रीब और ज़रूरतमंद बच्चों को पढ़ाते थे। ऐसे में उनके साथ किंजल शाह भी उनका हिस्सा जा बनीं। साल 2008 से किंजल शाह ग़रीब बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही हैं। जी हाँ, दोस्तों की संगत से ख़ुद में अच्छा निखार लाकर किंजल शाह 5-6 ग़रीब बच्चों को लेकर पढ़ाने लगीं और उनके चतुर्मुखी विकास के लिए उन्हें कई तरह की एक्टिविटी में इन्वॉल्व कराने लगीं। इससे उन बच्चों में समाज की मुख्य धारा में आने वाले बच्चों जैसी ही क्षमता का विकास हुआ।
आपको बता दें कि किंजल शाह ने अपने इस काम को आगे भी जारी रखना चाहा और इसके लिए उन्हें पढ़ाने की जगह की ज़रूरत थी। किंजल शाह ने अहमदाबाद की गुलबाई टेकरा बस्ती के नगरपालिका स्कूल में जाकर बात की, जिसके बाद हर शनिवार और रविवार को दो-दो घंटे किंजल शाह वहाँ ग़रीब बच्चों की क्लास लेने लगीं। किंजल यहाँ मूर्तियाँ बनाने वाले मजदूरों के बच्चों को फ़्री में पढ़ाती थीं, जिनके भीतर पढ़ने की ललक तो थी, लेकिन उनके पास पढ़ने की कोई सुविधा नहीं थी।
किंजल शाह को एक कंपनी में नौकरी मिल जाने के बाद उनके इस काम में थोड़ी रुकावटें बी आयीं, लेकिन फिर भी पूरी तरह से किंजल शाह ने इस काम को बंद नहीं किया। वह बस्ती में लगातार जाती ही रहीं। कुछ समय बाद किंजल शाह को लगने लगा कि उन बच्चों की बेहतरी के लिए काम करने में उनकी नौकरी आड़े आ रही है। ऐसे में अब किंजल शाह को स्पष्ट तौर पर समझ में आ चुका था कि उनकी ख़ुशी किसी बड़ कंपनी के साथ नौकरी करने में नहीं, बल्कि इन ग़रीब और ज़रूरतमंदों की मदद करने में है।
आपको बता दें कि इसके बाद किंजल शाह ने अपनी नौकरी को पूरी तरह से छोड़ दिया और इन ज़रूरतमंदों को ख़ूब मेहनत से पढ़ाने लगीं। और 2008 में छह बच्चों से शुरू हुआ किंजल शाह का ये सफ़र आज 600 बच्चों तक जा पहुँचा है। किंजल शाह अब ये काम श्वास नाम का अपना एक एनजीओ बनाकर करती हैं।
Author: Amit Rajpoot
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