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कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है... और ये बात साइकिल की बढ़ती उपयोगिता के जरिए सिद्ध हो रही है। जैसा कि दिन पर दिन बढ़ते प्रदूषण और आसमान को छूती ईंधन की कीमतों के चलते एक बार फिर दुनिया साइकिल की सवारी करने को मजबूर हो चली है। दुनिया के कई विकसित देश में तो सड़को पर ज्यादातर साइकिल सवार ही नजर आने लगे हैं। ऐसे में मजबूरी में ही सही, पर आज साइकिल की उपयोगिता कही उतनी पहुंच चुकी है, जितना कि इसके आविष्कार के बाद शुरूआती दिनो में थी। हालांकि आज जिस रूप में साइकिल है, वहां तक पहुंचने में इसे कई सौ साल लगे हैं। दरअसल, समय के साथ तकनीकि विकसित होती गई और साइकिल की डिजाइन बदलती गई। आज वर्ल्ड साइकिल डे के मौके पर हम आपको साइकिल के इसी इतिहास और समय के साथ बदलते इसके रूप के बारे में बताने जा रहे हैं।
असल में आज जिस दो पहिए के वाहन को आप साइकिल के रूप में जानते हैं, कभी ये चार पहियों का हुआ करता था। दरअसल, आम तौर पर साइकिल का आविष्कारकर्ता स्कॉटलैंड के मैकमिलन को माना जाता है, जिसने 1839 में पेडल वाले साइकिल का इजाद किया था, पर असल में इससे तकरीबन 400 साल पहले 1418 में ही पहिये से एक वाहन बनाने की शुरुआत हो चुकी थी।
जी हां, साइकिल की इतिहास की बात करें तो इसकी शुरुआत दो पहिये से नहीं, बल्कि चार पहिये से हुई थी। बताया जाता है कि उस वक्त साइकिल को ऐसा इसलिए बनाया गया था ताकि इसे चलाने में कोई परेशानी ना हो। प्रसिद्ध इंजीनियर और विद्वान जिओवानी फोंटाना ने चार पहिया वाहन जैसा ही कुछ बना दिया था, पर 400 सालों तक किसी ने उनकी इस खोज पर कोई खास ध्यान नहीं दिया था।
इसके लगभग चार सौ साल बाद 1817 में कार्ल ड्रेस ने चार पहिया साइकिल को बदल कर उसे दो पहिये में तब्दील किया। चूंकि इस समय तक कोई ऐसा स्वचालित वाहन नहीं था, जिसके जरिए व्यक्ति अकेला सफर कर सके, ऐसे में कार्ल द्वारा निर्मित ये साइकिल यूरोप में 'हॉबी हॉर्स' के नाम से काफी लोकप्रिय हुआ ।
हालांकि अभी कार्ल ड्रेस की साइकिल में बहुत सी कमियां थी, क्योंकि अभी भी उस साइकिल को पैरों से धकेलना पड़ता था। ऐसे में इस मेहनत को खत्म करने के लिए ही पेडल का आविष्कार हुआ, जिसका श्रेय जाता है, स्कॉटलैंड के एक लोहार 'मैकमिलन' को। 1839 में मैकमिलन ने साइकिल में पेडल लगाकर साइकिल का पूरा हिसाब ही बदल गया।
हालांकि अभी भी ये साइकिल सुविधा और सुरक्षा की लिहाज से सही नहीं थी, क्योंकि जहां इसका वजन तकरीबन 26 किलो था, वहीं इसका पहला पहिया बहुत बड़ा और पिछला पहिया काफी छोटा था। इसके बाद 1880 में 'जे के स्टारले' ने लोगों की सुरक्षा का ध्यान में रखते हुए 'रोवर साइकिल' का निर्माण किया। इसकी खासियत ये थी कि इसमें पेडल आगे के टायर नहीं बल्कि पीछे के टायर से जुड़े होते थे।
इसके बाद तो साइकिल प्रचलन में आ गया, 1920 के दशक में तो बच्चों के लिए भी साइकिलें बनानी शुरू हो गईं। 60 के दशक तक तो साइकिल लोगों के बीच इतनी लोकप्रिय हो गई कि इनका प्रयोग रेसिंग में भी किया जाने लगा। वैसे इसके बाद भी समय के साथ-साथ साइकिल में कई सारे बदलाव किये गए जो कि आज भी जारी है।
Author: Yashodhara Virodai
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