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प्रकाश सिंह रघुवंशी उत्तर प्रदेश में वाराणसी ज़िले के तड़िया गाँव के रहने वाले हैं। एक दुर्घटना के चलते इन्हें पेनिसिलिन के इंजेक्शन का रिएक्शन हो गया था, जिसके चलते इन्हें छह महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा था। हैरानी की बात है कि इस रिएक्शन के चलते प्रकाश सिंह रघुवंशी के आँखों की रोशनी लगभग जा चुकी थी। चूँकि इस घटना से पहले प्रकाश सिंह रघुवंशी की शादी हो चुकी थी, जिसके बाद तो परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी भी इन्हें निभानी थी। ऐसे में प्रकाश सिंह रघुवंशी के पास बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी और समस्या सामने आन खड़ी थी।
प्रकाश सिंह रघुवंशी कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे कि उनके बच्चों को बेहतर भविष्य मिले और समाज को एक नई दिशा भी मिले। लेकिन प्रकाश सिंह रघुवंशी के पास कोई रास्ता नहीं दिखाई पड़ रहा था। ऐसे में जब कोई रास्ता नहीं निकला तो प्रकाश सिंह रघुवंशी ने बचपन में अपने पिता से सीखा हुआ पौधों को परखने का हुनर उनके काम आया। इसके बाद साल 2000 तक प्रकाश सिंह रघुवंशी ने गेहूँ, धान और कुछ दालों की कई तरह की क़िस्में इकट्ठा कर लीं। इसके बाद इन सभी का डेटा रिकॉर्ड किया।
आपको बता दें कि आँखों की रोशनी कम होने के बावजूद खेत में खड़ी फसल में भी प्रकाश सिंह रघुवंशी अलग क़िस्म के पौधे पहचान लेते हैं। यह उन्हें क़ुदरत के द्वारा दिया गया हुनर था, जो बड़ा करिश्माई था। प्रकृति के इस उपहार को प्रकाश सब में बाँटना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने बीजों का दान कर शुरू कर दिया। स्वदेशी बीजों के लिए इन्होंने अभियान भी चलाया। इसके लिए इन्हें नेशनल इनोवेशन अवॉर्ड भी दिया गया। इसके अलावा खेती के क्षेत्र में इन्हें लाइफ़टाइम अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। साथ ही इटली की चर्चित संस्था ‘स्लोफूड’ ने भी प्रकाश सिंह रघुवंशी को अपना स्थाई सदस्य बनाया है।
Author: Amit Rajpoot
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