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सेक्स एक ऐसा विषय है, जिसके बारे में ख़ुलकर बात करना आज भी हमारे समाज में वर्जित है। लोग सेक्स की बात करने पर या तो शर्मा जाते हैं या फिर किसी न किसी तरह के पूर्वाग्रहों में सिमटे हुये सेक्स की बात करने वाले के प्रति जजमेंटल हो जाते हैं। इन सब बातों का जो सबसे बड़ा नुकसान होता है, वह यह है कि सेक्स को लेकर लोग ज़रूरी बात नहीं कर पाते हैं और फिर ऐसे में धीरे-धीरे सेक्स को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ घर कर जाती हैं। ये भ्रांतियाँ इतनी नुकसानदायक होती हैं कि हम सेक्स को एन्जॉय ही नहीं कर पाते हैं। वास्तव में सेक्स से जुड़े कई तरह के मितक होते हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ कर हम जीभर जी सकते हैं। आइए जानें सेक्स से जुड़े ऐसे ही कुछ मिथकों के बारे में।
1. एल्कॉहॉल से बढ़ती है उत्तेजनाः
बहुत से लोगों को यह गलतफहमी रहती है कि ऐल्कॉहॉल कामोत्तेजक के रूप में काम करता है और सेक्शुअल ऐक्ट से पहले इसका सेवन करने से दोनों पार्टनर के मन में मौजूद किसी भी तरह का अवरोध खत्म हो जाता है और लोग खुलकर सेक्स करते हैं। हकीकत यह है कि बहुत ज्यादा ऐल्कॉहॉल के सेवन से मेल सेक्स हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन का उत्पादन घट जाता है जिससे सेक्स के प्रति कामेच्छा घटने लगती है। इसलिए ध्यान रखें कि सेक्स जितना होश में हो वह उतना ही स्थाई और आनन्द देने वाले होता है।
2. साइज़ का मैटरः
लड़के और लड़कियाँ दोनों लोगों को कई बार ऐसा लगता है कि सेक्स में पीनस का साइज़ बहुत मैटर करता है। इसे लेकर तो बहुत सी हवाएँ दुनियाभर में मिथक बनी हुयी है, जबकि ऐसा नहीं है। ये सब तो ज़्यादातर लोग पॉर्न फ़िल्मों के कारम धारमा बना बैठते हैं। इसकी सच्चाई तो यह है कि वजाइना के सिर्फ 4 सेंटीमीटर हिस्से में सेंसरी नर्वस होते हैं जिससे उत्तेजना और ऑर्गैज्म फील होता है।
3. इरेक्शन आकर्षण का संकेतः
कुछ लोग मानते हैं कि पुरुषों को लड़कियों में आकर्षण होते ही उनका इरेक्शन होता है। सेक्स के दौरान यदि ऐसा नहीं हुआ तो लोगों में भ्रांति है कि लड़के का लड़की में कोई इंटरेस्ट ही नहीं है और मन कुंठित होने लगता है। इससे आपको बचना चाहिए। आकर्षम का इरेक्शन से कोई संबंध नहीं होता है। इरेक्शन न होने की समस्या आपकी पार्टनर नहीं बल्कि फिजियोलॉजिकल, साइकोलॉजिकल या बायोलॉजिकल कारण हो सकते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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