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आधुनिक मानव सभ्यता की बेहूदगी का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि समग्र रूप से सबसे उपादेय माने जाने वाले सिंधु-गंगा के मैदान में मानवीय गतिविधियों के बलात् से वायु प्रदूषण का कोहराम मच गया है। जी हाँ, IGP यानी कि सिंधु-गंगा का मैदान देश के 11 लाख से अधिक लोगों की मौत की वजह बन चुका है। यहाँ वायु प्रदूषण की स्थिति भयावह हो चली है।
आपको ये जानकर थोड़ा आश्चर्य होगा कि 84 फ़ीसदी प्रदूषण के लिए अकेले सिंधु-गंगा के मैदान की भयावह स्तिथि ही ज़िम्मेदार है। साल दर साल यहाँ नागरिकों की मौतें वायु प्रदूषम के कारण हो रही हैं और यह मौतें सिंधु-गंगा के मादानों में मौजूद राज्यों में मानवीय गतिविधियों से पैदा हो रहा वायु प्रदूषण है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह बाक़ी के क्षेत्रों में भी पहुँचकर कोहराम मचा रहा है। इस प्रकार, इन मानवीय गतिविधियों से सिंधु-गंगा का मैदान कुढ़ता जा रहा है।
आपको बता दें कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर रोज़ 90 से अधिक शहरों के वायु प्रदूषण का डेटा जारी करता है। इंडो गैंगेटिक प्लेन्स (IGP)यानी कि सिंधु-गंगा का मैदान में मौजूद 14 प्रमुख शहरों में से 12 सबसे प्रदूषित शहरों में लगातार शामिल रहे हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे सभी राज्य शामिल हैं। आपको बता दें कि यह इसलिए और अधिक ख़तरनाक हो जाता है, क्योंकि देश की 43 फ़ीसदी आबादी यहीं रहती है। इतना ही नहीं इसे विश्व के कुछ सबसे घनी मानव आबादी वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।
ग़ौरतलब है कि सिंधु-गंगा का मैदान जहाँ अपने क्षेत्र के 84 फ़ीसदी प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार है, वहीं यह बाक़ी क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रहा है। ख़ासतौर पर उत्तर भारत में 24, पूर्वी भारत में 30 और मध्य भारत में 27 फ़ीसदी वायु प्रदूषण के लिए इसी सिंधु-गंगा का मैदान की दुर्दशा को ही ज़िम्मेदार माना गया है।
Author: Amit Rajpoot
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