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देश के कुछ हिस्सों में कुछ लोगों ने उन फूलों और पौधों को संरक्षित करने का काम किया है, जिन्हें पवित्र माना जाता है। वास्तव में ये सवाल बड़ा अहम है कि किसी पेड़ की पत्ती को दूसरे से पवित्र क्यों माना जाता है? किसी एक फूल या पत्ती को किसी दूसरे से अदि पवित्र क्यों माना जाता है, क्यो येकिसी तरह का पक्षपात है या फिर कोई बकवास है। फर्ज कीजिए नीम का पेड़ और आम का पेड़ एक साथ एक ही जगह पर रोपे हुये हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि दोनों के फलों में और उनकी पत्तियों में ज़मीन-आसमान का अन्तर है। दोनों की पत्तियों का गुणधर्म अलग-अलग है और उनका स्वाद भी।
आपको ये समझना होगा कि इस मिट्टी के साथ हर कोई अपने-अपने गुणधर्मों और प्रक्रियाओं के साथ जुड़े होते हैं। इन्हीं गुणधर्मों और प्रक्रियाओं के कारण ही हर छोटी से छोटी चीज़ और बड़ी से बड़ी चीज़ अपने को बनाती है और इन्हीं में से एक है विल्वा या बेलपत्र। जी हाँ, ऐसा नहीं है कि विल्वा या बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय है, बल्कि इसकी सच्चाई तो यह है कि विल्वा या बेलपत्र में मौजूद गुणधर्म अथवा जिस प्रक्रिया से बेलपत्र ने ख़ुद को पोषित किया है वह शिवा के स्पन्दन के सबसे क़रीब हैं।
इस प्रकार चूँकि बेलपत्र उस तत्व के सबसे ज़्यादा क़रीब है, जिसे हम शिव कहते हैं, यानी की वह उसी दिशा में है और उस शिव के निकट भी। इसलिए इसमें कोई दो राय नहीं है कि इसी कारण से शिव को बेलपत्र अर्पित किया जाता है, क्योंकि वह शिव से सम्पर्क बनाने का साधन बन जाती हैं। एक बात जो सबसे ख़ास है वह यह कि बेलपत्र में शिवत्व को या उसके स्पन्दन को सोखने की क्षमता सबसे अधिक होती है, इसलिए हमें शिव को अर्पित किये गये बेलपत्र को अपने साथ वापस ले आना चाहिए।
Author: Amit Rajpoot
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