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किसी भी चीज के दो पहलू जरूर होते हैं... अगर कोई चीज हमारे लिए बेहद सुविधाजनक हो जाए तो आपको ये जान लेना चाहिए कही ना कहीं आप इसके नकारात्मक पहलू का भी शिकार बन सकते हैं। जैसे कि आज के समय तकनीकि जितनी विकसित हो चुकी है, वो मानव जीवन के लिए खतरा भी साबित हो रही है। आज मोबाइल, कम्पयूटर और इंटरनेट का अत्यधिक प्रयोग के चलते कई सारी मानसिक और शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ऐसी ही एक बीमारी तेजी से युवाओं को अपना शिकार बना रही है और वो है नोमोफोबिया।
जी हां, हालिया हेल्थ स्टडी में ये बात सामने आई है कि तकनीक की लत के कारण युवा नोमोफोबिया नाम की बीमारी का तेजी से शिकार हो रहे हैं। ये अध्ययन कहता है कि आज हर तीसरा वयस्क उपभोक्ता एक साथ एक से अधिक उपकरणों का उपयोग करता है। वहीं लगभग 50 प्रतिशत उपभोक्ता ऐसे है जो कि मोबाइल पर गतिविधि शुरू करने के बाद फिर कंप्यूटर पर काम शुरू कर देते है। ऐसे में एक के बाद एक लगातार व्यक्ति तकनीकि उपकरणों के सम्पर्क में बना रहता है। जिसके चलते गर्दन में दर्द, आंखों में जलन, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम और अनिद्रा जैसी बीमारियां तो होती ही रहती हैं। साथ ही नोमोफोबिया जैसी बीमारी भी लोगों को अपना शिकार बना रही है।
बात करें नोमोफोबिया की तो ये 20 से 30 वर्ष की आयु के 60 प्रतिशत युवाओं को अपना शिकार बना चुकी है, जिन्हें मोबाइल फोन खोने की आशंका रहती है। यानी कि आपको मोबाइल फोन और दूसरे उपकरणों की लत इतनी बुरी तरह से लग चुकी होती है, कि आप उसके बिना एक पल भी नहीं रह पाते। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि फोन और कंप्यूटर पर आने वाले नोटिफिकेशन अलर्ट हमें लगातार उनकी ओर देखने के लिए मजबूर करते हैं, ऐसे में तंत्रिका-मार्गो को ट्रिगर करने जैसा होता है, जैसा कि कोई शिकारी में एक हमले के दौरान या व्यक्ति में कुछ खतरे का सामना करने पर होता है। यानी की इस दौरान हमारा मस्तिष्क लगातार सक्रिय और सतर्क रहता है, पर ये बेहद असामान्य तरह से होता है, जो कि हमारे दिमाग के लिए काफी हानिकार होता है।
ऐसे में जरूरी है कि समय रहते हम तकनीकि की अपनी इस लत पर काबू कर सकें। इसके लिए हम रोजाना की दिनचर्या में कुछ नियम बना सकते हैं। जैसे कि सोने से आधा घंटे पहले तक किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग न करें। फेसबुक या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कम से कम हर तीन महीने पर 7 दिन के लिए छुट्टी ले सकते हैं। इससे हम सोशल मीडिया के लती होने से बच सकते हैं या फिर हफ्ते में एक पूरे दिन सोशल मीडिया से बचें।
Author: Yashodhara Virodai
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