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वैसे तो एक अभिनेता अपनी कला और अभिनय के लिए जाता है, लेकिन हिंदी सिनेमा एक अभिनेता ऐसा भी था जिसे लोग उसके अभिनय से कहीं अधिक उसके बेहतरीन व्यक्तित्व के लिए जानते थें। जी हां, हम बात कर रहे हैं 60 के दशक के मशहूर अभिनेता सुनिल दत्त की... जिनका आज 90वां जन्मदिवस है। सुनिल दत्त के जन्मदिवस के खास मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प वाक्या आपके लिए लेकर आए हैं।
असल में सुनिल दत्त जितने बेहतरीन अभिनेता था, उतने बेहतरीन शख्सियत के धनी भी थे। ये सुनिल दत्त के करिश्माई व्यक्तित्व की ही बानगी थी कि लोग उन्हें अदब के साथ सुनिल दत्त साहेब कहते थें। ऐसे में आप सोच सकते हैं कि जिस शख्स के प्रति बाकी दुनिया के ऐसे विचार थे, उसका अपने परिजनो से कैसा लगाव होगा। जी हां, दुनिया जानती है कि सुनिल दत्त एक अच्छे फैमिली मैन भी थें, बात चाहें नर्गिस के प्रति उनके समर्पण की हो या फिर तीनों बच्चों के प्रति उनके स्नेह की।
खासकर उनका अपने बेटे संजय दत्त से खास लगाव था और वो संजय को प्यार से ‘चमेली जान’ कहकर बुलाते थें। जी हां, सुनिल दत्त अपने इकलौते बेटे संजू को प्यार से ‘चमेली जान’ कहते थें, असल में इसके पीछे भी एक दिलचस्प वाक्या है। जैसा कि आप सब जानते हैं सुनिल दत्त के बेटे हैं संजय दत्त, खुद एक मशहूर अभिनेता हैं और आमतौर पर कहा जाता है कि संजय दत्त के फिल्मी सफर की शुरूआत फिल्म रॉकी से हुई थी। पर असल में, वो पर्दे पर पहली बार पिता सुनिल दत्त की बहुचर्चित फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में नजर आए थें, हालांकि ये फिल्म बुरी तरह से फ्लॉर गई थी, पर इसी फिल्म में उनकी अपीयरेंस देखने के बाद पिता ने उन्हें चमेली जान का नाम दे दिया था।
असल में, 1971 में आई इस फिल्म रेशमा और शेरा के वक्त संजय दत्त 12 साल के थे और जब इस फिल्म की राजस्थान में शूटिंग चल रही थी तो संजू अपने स्कूल की छुट्टियों में घर आए थे। इसी बीच एक दिन जब वो राजस्थान में रेशमा और शेरा की सेट पर पहुंचे, तो वहां उनके पिता सुनील दत्त, जो कि उस फिल्म में लीड रोल के साथ साथ उसके निर्देशन का जिम्मा भी सम्भाल रहे थें, उनसे पूछा कि क्या वो उस फिल्म में काम करेंगे?
ऐसे में संजू इसके लिए तैयार हो गए और फिर सुनील दत्त ने उन्हें उस फिल्म की कव्वाली 'जालिम मेरी शराब में ये क्या मिला दिया' में कव्वाल गा रहे मुख्य कलाकार सुधीर लूथरा के साथ बिठा दिया।
ऐसे में जब ये पिक्चर बनकर पर्दे पर आई तो सुनील को संजू की परफॉर्मेंस बहुत पसंद आई और उन्होंने संजू को प्यार से चमेली जान बुलाना शुरू कर दिया। यहां तक कि जब भी वो संजू को लेटर लिखते थे तो उसमें बेटे के लिए डियर चमेली जान शब्द का इस्तेमाल किया करते थे।
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