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आज हमारे आसपास प्रदूषण की ऐसी परत जम चुकी है कि आप निरा प्रबंध कर लें कि आपको गंदी हवा अपने फेफड़ों में नहीं भरनी है, लेकिन चूँकि दरअसल हमारे वायुमण्डल में ही ऐसा कार्बन भरा पड़ा है कि अब हम जायें तो जायें कहाँ। इसका सबसे बड़ा जो नुकसान है वह यह है कि ज़हरीली हवा के कारण इंसानों की आयु 1.7 वर्ष कम हो रही है। जी हाँ, वायु प्रदूषण के कारण देश में सालाना एक लाख बच्चों की मौत हो रही है। ग़ौरतलब है कि प्रदूषण की ये बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट पर्यावरण थिंक टैंक सीएसआई के स्टेट ऑफ़ डियाज़ एनवायरन्मेंट (एसओसी) ने विश्व पर्यावरण दिवस 2019 में जारी की।
इस रिपोर्ट में उक्त बातों के अलावा यह भी कहा गया है कि संक्रमण और गैर सरकारी रोगों से बचाने वाले डॉक्टरों को लेकर भी देश गंभीर स्थित से जूझ रहा है। प्रदूषित हवा के कारण देश में 10 हज़ार लड़कों में से औसतन 8.5 की महज पाँच साल की आयु से पहले मौत हो जाती है, जबकि लड़कियों के मामले में यह ख़तरा और भी ज़्यादा है। जी हाँ, मालूम हो कि दस हज़ार में से 9.6 लड़कियों की मौत पाँच वर्ष की पूर्ण होने से पहले ही हो जाती है। वास्तव में यह स्थिति भीषण और भयावह है।
आपको बता दें कि धरातल पर जानलेवा बने इस प्रदूषण का असर बढ़ता ही जा रहा है। इनमें सिंधु-गंगा के मैदान में पड़ने वाले कई राज्यों में से चार राज्यों की स्थिति सबसे ज्यादा बुरी है। इन्हें देश के चार सबसे प्रदूषित राज्यों में गिना जाता है। आपको बता दें कि इनमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को शामिल या दर्ज़ किया गया है। जी हाँ, इन चारो राज्यों में प्रदू,म का सबसे ज़्यादा कहर है। इन चारों में मौत के आँकड़ों की बात करें तो वह उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है।
Author: Amit Rajpoot
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