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ईराक़ में मोतियों के लिए बेहद मशहूर शहर बाशरा में एक सूफ़ी फ़कीर रहते थे। एक बार किसी व्यक्ति ने आकर उनसे कहा कि हमें कोई सीख दीजिये तो उस सूफ़ी फ़कीर ने उस व्यक्ति को स्पष्ट तौर पर मना कर दिया कि की सीख नहीं है। इस प्रकार से एक बार फिर कोई दूसरा व्यक्ति उस सूफ़ी फ़कीर के पास पहुँचा कि हमें कोई सीख दीजिए, तो इस बार भी उस सूफ़ी संत ने मना कर कह दिया कि कोई सीख नहीं है। ऐसे ही उस सूफ़ी संत ने हर किसी को लौटा दिया जो भी उनसे कुछ सीख लेने पहुँचता था। अंत में उस सूफ़ी संत का बहुत नाम हो गया।
फिर एक दिन एक अति विद्वान व्यक्ति उस सूफ़ी के पास पहुँचा और बोला कि आपको कुछ न कुछ देनी ही पड़ेगी, क्योंकि आपके पास कुछ विशेष ज्ञान है। इसलिए दूसरों को भी इसका इल्म हो और यह तभी सम्भव होगा जब आप दूसरों को कुछ सीख देंगे। क्या आप इसके लिए तैयार हैं? उस विद्वान की बात सुनकर सूफ़ी महात्मा ने कहा कि मैं आप लोगों को सीख नहीं दे रहा, इसलिए नहीं कि मैं इसके लिए अभी तैयार नहीं हूँ, बल्कि इसलिए क्योंकि तुम अभी इसके लिए तैयार नहीं हो।
जी हाँ, सूफ़ी बोले कि यदि आपको लगता है कि आप कुछ बहुत ज़रूरी काम कर रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपके छुट्टी लेने का वक़्त आ गया है, वरना आप डेड Serious हो जाएँगे। जैसे आपको लगता है कि मुझसे कोई सीख पाना आपके लिए कोई बहुत ज़रूरी काम हो। समझने वाली बात है कि अपने आप को नॉन सीरियस करके आप इस डेड Serious होने की बला से बच सकते हैं।
दिलचस्प है कि इसके लिए आप कुछ मूर्खता भरे काम कीजिए मसलन, बेढ़ंग होकर नाचिए, किसी को चिढ़ाइए या फिर किसी की बेगारी का ही काम कर आइए। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं और हरदम सिर्फ़ काम को लेकर Serious रहते हैं तो फिर आप एक दिन ऐसी अवस्था में चले जाएँगे जब आप हरदम Serious ही रहेंगे। यही डेड Serious होना है।
Author: Amit Rajpoot
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