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हठ योग को जानने से पहले हमें इस बात को समझ लेना चाहिए कि हठ का मतलब होता है ज़िद और शरीर को सही और नया आकार देने के लिए तथा शरीर की सम्पूर्ण व्यवस्था को पुनर्स्थापित करने के लिए हमें ज़िद यानी कि हठ की आवश्यकता होती है। शरीर को फिर से बनाने का मतलब है कि जब पहली बार आपका शरीर बना तो वह ज़्यादातर उस जानकारी से बना जो आपको आपके माता-पिता से मिली। वो स्मृति जो उनके शरीर में बसी थी वह दोनों एक साथ आकार आधार बनते हैं और फिर मिलकर मेमोरी का एक ऐसा कॉम्प्लेक्स सिस्टम तैयार होता है, जिससे की आप बनते हैं। ऐसे ही हर बच्चा पैदा होता है।
आप पाँच पीढ़ी पीछे जाकर देखिए और फ़र्ज़ कीजिए कि यदि आपके परदादा के परदादा काफी तेजस्वी, बलवान और बुद्धिमान थे, लेकिन आपके पिता कमज़ोर शरीर वाले और कम बुद्धि वाले हैं। ऐसे में आप अपने पिता की तरह न बनकर अपने परदादा के परदादा जैसा बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कुछ ख़ास तरह के योगों को अपनाना होगा, जिससे कि आपका चित आपके परदादा के परदादा की मेमोरी को पहचानकर उसे सबसे ज़्यादा सक्रिय कर सकते हैं।
आपको बता दें कि हठ योग करने का एक ख़तरा भी होता है और इसके लिए आपको जागरुक रहने के अलावा चौकन्ना भी करना होगा। आपके पास ज़रूरी साधना होनी चाहिए, वरना आपका हठ बेकाबू हो जाएगा और ऐसा भी संभव है कि लोग जल्दी मर भी सकते हैं। जी हाँ, आपको बता दें कि यदि कोई अपनी जेनेटिक मेमोरी से दूरी बना लेता है, लेकिन अपने सिस्टम को बनाने के लिए ज़रूरी काम नहीं करता है तो उसका सिस्टम जल्द ही ढह सकता है।
ग़ौरतलब है कि चूँकि सूर्य को पिता की तरह और चन्द्रमा को माँ की तरह देखा जाता है। यही हमारे जीवन निर्माण के लिए उत्तरदायी है। इसलिए हठ योग के माध्यम से हम अपने जीवन के आदि पिता और आदि माँ क्रमशः सूर्य और चन्द्रमा के साथ सम्पर्क कर सकते हैं। सूर्य और चन्द्रमा ही हमारे असली पिता और माता है। हठ योग की प्रकृति से हम धीरे-धीरे सूर्य और चन्द्रमा से जुड़ सकते हैं। एक हठ योगी जब आँख बंद करे तो उसे चन्द्रमा की कला का पता होना चाहिए कि आज चन्द्रमा की कौन सी कला है।
Author: Amit Rajpoot
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