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इंटरनेट के इस युग में बच्चों और युवाओं में ऑनलाइन गेम्स का क्रेज इस कदर बढ़ चुका है कि अब बात जान पर आ पड़ी है। जी हां, कुछ समय पहले तक ‘ब्लू व्हेल’ गेम की लत जहां किशोरों और युवाओं के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आई थी, वहीं अब ‘पबजी गेम’ की लत युवाओं और किशोरों की जान ले रही है। साल की शुरूआत में जहां जम्मू में एक ऐसा मामला सामने आया था जिसमें एक फिटनेस ट्रेनर ने 10 दिन तक लगातार पबजी खेलने के बाद अपना मानसिक संतुलन खो दिया, वहीं अब मध्य प्रदेश में पब्जी खेलते-खेलते 16 साल के लड़के की मौत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। वैसे ऐसे और भी मामले सामने आए हैं, जिसमें पबजी के घातक परिणाम देखने को मिले हैं।
ऐसे में समय रहते ही बच्चों को इसका शिकार बनने से रोकने में ही भलाई है। आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं कि किस तरह से आप अपने बच्चे की पबजी की लत छुड़ा सकते हैं।
ऐसे भांपे पबजी का खतरा
जी हां, सबसे पहले तो आपके लिए ये पहचानना जरूरी है कि आपका बच्चा किस हद तक पबजी का शिकार बन चुका है, क्या उसे वाकई इसकी लत है या नहीं? दरअसल,अगर आपका बच्चा लगातार 4 से 5 घंटे पबजी खेल रहा है और इससे बाकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है, साथ ही इसके चलते उसके व्यवहार में अंतर आ रहा है, तो फिर समझ जाइए कि आपका बच्चा पबजी की लत लग चुकी है। वहीं अगर वो ढंग से पबजी खेल रहा है, तो फिर ये पबजी की लत नहीं है। लेकिन फिर भी आपको सतर्क रहने की जरूरत है कि कहीं वो धीरे-धीरे इसका लती ना हो जाए।
बच्चें को दें दूसरा बेहतर विकल्प
जी हां, अगर आपके बच्चे को पबजी की लत लग चुकी है, तो आपको उसे पबजी खेलने से रोकने की बजाए बेहतर होगा कि आप उसे दूसरे बेहतर और मनोरंजक खेल विकल्प दें। क्योंकि आप अगर सीधे तौर पर पबजी खेलने से रोकेंगे तो हो सकता है कि वो इस पर गलत तरह से रिएक्ट करें और भी आक्रमक हो जाए। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप बच्चें को शतरंज, सुडोकू, टिक टैक और वर्ग पहेली से गेम से रूबरू कराएं, क्योंकि ये सारे गेम रोचक होने के साथ-साथ दिमाग को भी शार्प बनाते हैं। ऐसे में ये खल बच्चों के दिमागी विकास के लिए लाभदायक साबित होते हैं।
निर्धारित करें समय सीमा
आज के समय में आप बच्चों को इंटरनेट का उपयोग करने से पूरी तरह से रोक नहीं सकते हैं, ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप उनके लिए एक निर्धारित समय सीमा तय कर दें, ताकी वो इस पर अधिक वक्त जाया ना करें। या फिर उसके लिए निश्चित डाटा खर्च करने की सीमा तय कर दें। इसके अलावा घर में लगे वाई-फाई की स्पीड की भी कम कर सकते हैं, क्योंकि इससे इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड में रुकावट आएगी, जिसके चलते खेल में परेशानी होगी।
लक्षण गंभीर होने पर मनोचिकित्सक से सम्पर्क करें
जी हां, जैसे कि आपको ये लगने लगें कि आपका पबजी का पूरी तरह से शिकार हो चुका है, जिसके चलते उसके व्यवहार में भी बदलाव आने लगें हैं, तो फिर जरा भी देर मत करिए। बल्कि आपको उसे तुरंत किसी अच्छे मनोचिकित्सक को दिखाने की जरूरत है।
Author: Yashodhara Virodai
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