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किसी ने बहुत सही कहा है कि उत्साह बड़ा संसर्गजन्य होता है, जिसके साथ हम दुनिया का बड़ा से बड़ा काम कर जाते हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण हमें हाल ही में छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव ज़िले में देखने को मिला है। जी हाँ, आपको बता दें कि राजनांदगाँव जिले की डोंगरगाँव तहसील के मारगाँव में लगभग 150 वर्ष पुराना एक तालाब क़रीब-क़रीब मृत पड़ा था, जिसे वहाँ के गाँव वालों ने पृथ्वी फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर पुनर्जीवित कर दिखाया है। लगभग चार पीढ़ी पुराने इस तालाब को खम्बा तालाब के नाम से जाना जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस कारनामे को गाँव वालों ने बिना किसी अनुबंध के ही करने का साहस दिखाया है।
आपको बता दें कि खम्बा तालाब को डेढ़ सदी पहले गोंड राजा कलिंदर सिंह ने बनवाया था। लेकिन समय के साथ यह बहते जल की जगह सूखे, गाद और कीचड़ से परिलक्षित हो गया, जैसा कि आज भारत के अधिकतर तालाबों का हाल है। लेकिन फिर एक दिन खम्बा तालाब पर पृथ्वी फाउंडेशन की नड़र पड़ी। तभी इस संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सासंद प्रदीप गाँधी और इसके सलाहकार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी व चिंतक डॉ. कमल टावरी ने मिलकर यह निश्चय किया कि इस बहुमूल्य खम्बा तालाब को पुनर्जीवित करना है और इसके लिए सरकारों सदासयता नहीं, बल्कि जनभागीदारी को हथियार बनाया जाये।
ग़ौरतलब है कि इसके लिए डॉ. कमल टावरी ने 6-P मॉडल तैयार किया, जिसमें Public, Privet, Panchayat, Profitable, Progressive और Partnership को सम्मिलित किया। इसी के साथ वह आगे बढ़े और फिर प्रदीप गाँधी का साथ पाकर इस दिशा में आगे काम करते रहे और लोगों को इसके लिए जागरुक करने के साथ-साथ उन्हें अपने साथ जुटाते भी गये। अच्छी बात यह रही कि दोनों की मेहनत ने और बेहतर संवाद से लोगों में चेतना जगी और खम्बा तालाब के पुनर्जन्म की तैयारियाँ शुरू हो गयीं। इसके लिए स्थानीय लोगों में ग़ज़ब का साहस देखते बना। उन्होंने इसके लिए अपना मन, खून और पसीना पूरी तरह से लगा दिया।
खम्बा तालाब के पुनर्जन्म के इस पूरे प्रकल्प में 25 दिन लगे और इसमें 2,200 ट्रैक्टर मिट्टी की इस प्रकार जनसहयोग से ढुलाई की गयी वह अपने आप में आश्चर्य है। इस निर्गत मिट्टी को भी पास के खेतों में उपयोग कर लिया गया। ग़ौरतलब है कि आज जहाँ जाति और धर्म के नाम पर विघटन मचाने की होड़ लगी है वहीं इस कार्य में कुल 17 जातियों ने एक ठौर पर आकर काम किया, जो अब जबकि तालाब में फिर से पानी आ गया है, सभी इसी एक घाट का पानी पियेंगे। वास्तव में पृथ्वी फ़ाउंडेशन के इस बेहतरीन काम से सभी को प्रेरणा लेने की ज़रूरत है, जिसने पर्यावरण संरक्षण की इतनी बड़ी मिसाल क़ायम की है। मालूम हो कि पृथ्वी फ़ाउंडेशन की विचारधारा पञ्च-महाभूतों की स्तुति करने वाले वेदों पर आधारित है।
Author: Amit Rajpoot
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