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बुद्ध ने दुनिया को प्रेम का संदेश दिया है। बुद्ध कहते हैं कि प्रेम से घृणा को जीता जा सकता है। जी हाँ, बिना युद्ध किये हुए ही प्रेम के माध्यम से आप पूरी दुनिया को जीत सकते हैं। आप स्वयं सोचिए कि आपको पूरी दुनिया से क्या चाहिए। ज़ाहिर बात है कि हम सभी प्रेम चाहते हैं, न कि घृणा। लेकिन फिर हम सभी प्रेम के भाव को समझ क्यों नहीं पाते हैं और हमारा प्रेम विकृत हो जाता है। इच्छा से प्रेम उत्पन्न होता है, लेकिन अज्ञानता से वही प्रेम घृणा और वासना में बदल जता है। ऐसे में प्रेम ही इस दुनिया को चलाने का एक मात्र साधन है।
बुद्ध कहते हैं कि जो प्रेम करुणा लाये, त्याग सिखाए, जो आसपास आनन्द और शान्ति लेकर आये वह प्रेम सच्चा और वास्तविक होता है। इसके विपरीत जो प्रेम लालच को बढ़ाये, स्वतंत्रता का हनन करे, मन में अशान्ति लेकर आये, मन की पीड़ा को बढ़ाए, क्रूरता को बढ़ाये, क्रोध का निर्माण करे तथा पाप कर्म कराए ऐसे प्रेम को प्रेम नहीं कहते हैं। वास्तव में प्रेम में भरपूर मदहोश होकर तथा आनन्दित होकर जीना ही सुखकारी होता है, इसके विपरीत आनन्दित न रहना, व्याकुल रहना, प्रेम में ग़लत काम करना तथा ख़ुश न रहना प्रेम में पीड़ा देने वाला होता है।
आपको बता दें कि हम सभी लोग किसी न किसी से प्रेम करते हैं। माता-पिता, अपने बच्चों से, भाई बहन से, प्रेमी प्रेमिका से। लेकिन सवाल यह है कि हम जो भी प्रेम करते हैं वह सच्चा है कि नहीं। ज़ाहिर सी बात है कि जो प्यार स्वार्थ पर टिका है वह पीड़ा देने वाला होता है, फिर यह प्रेम किसी से भी साथ हो। इसलिए प्रेम में सदैव देने का विचार रखना चाहिए न कि कुछ लेने का। जहाँ आपने प्रेम में रहकर कुछ पाने की सोचने लगे यह आपको पीड़ा से भर देगा।
Author: Amit Rajpoot
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