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आमतौर पर छोटे बच्चों को मां अपने पास ही सुलाती है, खासकर नवजात शिशुओं के लिए तो मां का स्पर्श बेहद लाभकारी माना जाता है। लेकिन अब हालिया हेल्थ रिसर्च ने तो ऐसे सभी बातों को गलत साबित कर दिया है। जी हां, इस शोध की माने तो बच्चे के साथ सोना उनकी जान के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
असल में, इस शोध में 24 राज्यों में 2004 से लेकर साल 2012 के बीच हुई 8,207 शिशुओं की मौत से संबंधित सरकारी आंकड़ों का अध्ययन किया गया, जिसमें निश्कर्ष के रूप में ये सामने आया कि सोते वक्त अचानक जान गंवाने वाले 69 फीसदी बच्चे बिस्तर में किसी न किसी के साथ थे। जी हां, इस शोध में अध्ययनकर्ताओं ने ये पाया कि बहुत छोटे बच्चों के साथ सोने से उनकी जान को खतरा होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई शिशु किसी के साथ सोता है तो कई बार दूसरे व्यक्ति के दवाब या हाथ के वजन से उसकी सांस रुक जाने का खतरा होता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों कहते हैं कि कभी बच्चों को गोद में दबोच कर, या फिर उसके ऊपर हाथ-पैर रखकर नहीं सोना चाहिए। दरअसल, शिशु का दिल बहुत नाजुक होता है, ऐसे मे जरा से भी वजन के चलते उसकी सांसे रूक सकती है या फिर उसके किसी अंग पर जोर पड़ सकता है, जिसके कारण उसका दम घुट सकता है।
ऐसे में अमेरिकन एकेडेमी ऑफ पीडिएट्रिक्स का कहना है कि पैरेंट्स को बच्चो के पास सोना चाहिए, पर एक ही बिस्तर पर नहीं। साथ ही ये भी ध्यान रखना चाहिए कि आपके शिशु को बहुत अधिक कंबल में ना लपेटें या फिर उसके बगल में कोई सॉफिट टॉय ना रखें। कई बार सॉफ्ट टॉय की वजह से भी बच्चों की जान पर बात आन पड़ती है। इसलिए बच्चें के पास अतिरिक्त कपड़ा या सॉफ्ट टॉय या कोई भी भारी चीजें ना रखें, जिससे उन पर दवाब पड़ें।
Author: Yashodhara Virodai
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