Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
जहां एक तरफ मौसम की मार के चलते आम जनजीवन बेहाल है, वहीं यूपी-बिहार में चमकी बुखार का कहर बरप रहा है। जी हां, बिहार में चमकी बुखार के चलते कई सारे मासूमों की जान जा चुकी हैं, वहीं यूपी के पूर्वांचल में भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई हैं। शहर के तमाम अस्पताल बच्चों से भरे परे हुए हैं और दिन पर दिन बीमार बच्चों की संख्याएं बढ़ती ही हा जा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण इस बीमारी के प्रति लोगों में जानकारी और सतर्कता की कमी होना। ऐसे में आज हम आपको इस बीमारी के लक्षणों और इससे बचाव के बारे सतर्क करने जा रहे हैं।
दरअसल, जापानी इंसेफलाइटिस को उत्तरी बिहार और पूर्वी यूपी में चमकी बुखार के नाम से जाना जाता है, जो कि 4 से 15 साल के बच्चों को अपना शिकार बनाती है। इसमें बच्चे को तेज बुखार के साथ शरीर में ऐंठन और उल्टी आने की शिकायत होती है। वहीं परेशानी बढ़ने के साथ ही बच्चा बेहोश भी सकता है। इसके अलावा बच्चे में चिड़चिड़ापन, भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना, दिमागी असंतुलन, पैरालाइज हो जाना, मांसपेशियों में कमजोरी, बोलने और सुनने में दिक्कत होना जैसी समस्याएं पेश आती हैं। ऐसे में अगर इनमें से कोई भी लक्षण बच्चे में नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। क्योंकि इसमें समय रहते ही इलाज बेहद जरूरी है, वरना बात जान पर बन आ पड़ती है।
अब बात करते हैं इससे बचाव की तो जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, वहां परिजनो को खासा सतर्क रहने की जरूरत है। असल में, ये बीमारी गर्मियों के मौसम में तेजी के साथ बच्चों को अपना शिकार बनाती है, क्योंकि इस मौसम में अधिक तापमान के साथ ही ह्यूमिडिटी भी अधिक रहती है। वहीं इस बुखार का अटैक ज्यादातर सुबह के समय ही होता है। ऐसे में इससे बचाव के लिए परिजनो को छोटे बच्चों के रख रखाव पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
डॉक्टरों की सलाह है कि गर्मियों के मौसम में बच्चों में पानी की कमी बिलकुल भी ना होने दें, इसके लिए समय-समय पर उन्हें पानी और दूसरे तरल पदार्थ देते रहें। वहीं बच्चे को भूखा भी न रहने दें। साथ ही रात में बच्चे को खाने के बाद मीठा जरूर खिलाये। असल में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी में बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी कि अचानक शुगर की कमी की पुष्टि हो रही है। ऐसे में बच्चों को ग्लूकोज, जूस और शिकंजी जैसे तरल पदार्थ देते रहने चाहिए।
Author: Yashodhara Virodai
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.