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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की महिलाओं को बड़ा तोहफा देते हुए ऐलान किया है कि दिल्ली की महिलाएं कुछ समय बाद मेट्रो और DTC बसों में मुफ्त सफर कर सकेंगी। यकीनन महिलाओं के लिए यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। दिल्ली सरकार ने अब इस घोषणा पर काम करना भी शुरु कर दिया है। हालांकि, बात करें जनता कि तो केजरीवाल के इस तोहफे पर वह भी दो भागों में बंट गई है... कुछ लोग केजरीवाल का सपोर्ट कर रहे हैं, तो कुछ लोग उन्हें कोस रहे हैं और उनके इस फैसले को वोट की राजनीति बता रहे हैं।
लेकिन, अब खुद अरविंद केजरीवाल ने आगे आकर वजह साफ की है कि क्यों औरतों के लिए मेट्रो और DTC बस यात्रा मुफ्त की जानी चाहिए।
जो लोग इसे जेंडर इक्वालिटी के खिलाफ की गई घोषणा बता रहे हैं, उन्हें केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जवाब दिया है-
<blockquote class="twitter-tweet" data-lang="en-gb"><p lang="hi" dir="ltr">जेंडर इक्वलिटी के सवाल पर <a href="https://twitter.com/ArvindKejriwal?ref_src=twsrc%5Etfw">@ArvindKejriwal</a> का जवाब:<br><br>-घर में माँ,बेटी,बहन,बीवी को अगर ये फ्री मिलता है तो घर की ट्रेवल कॉस्ट कम हो जाती है<br>-जबजब महिलाओं को opportunityदी गई है,तब फैमिली इनकम बढती है, इकॉनमी बढती है और पूरे देश केलिए फायदेमंद होता है,समाज में बराबरी का हक़ मिलता है <a href="https://t.co/AFZVJLDB3P">pic.twitter.com/AFZVJLDB3P</a></p>— AAP Express 🇮🇳 (@AAPExpress) <a href="https://twitter.com/AAPExpress/status/1138819265857896449?ref_src=twsrc%5Etfw">12 June 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
उन्होंने कहा, “हमारे देश में 'जेंडर इक्वॉलिटी' है क्या? क्या हमारे देश में महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा मिला हुआ है? नहीं मिला हुआ है। आज स्थिति ऐसी है कि पैदा होने के पहले अगर पता चल जाए कि पेट में बेटा नहीं, बेटी है। तो अबॉर्शन करवा दिया जाता है। अगर आज परिवार के अंदर एक बेटा और एक बेटी है और पढ़ाने के लिए एक का ही पैसा है... तो बेटे को ही पढ़ने के लिए भेजा जाता है। आज दिल्ली मेट्रो के अंदर 30 प्रतिशत महिलाएं ट्रेवल करती हैं, 70 प्रतिशत पुरुष ट्रेवल करते हैं। इसी से झलकता है कि महिलाएं और पुरुष बराबर नहीं है। आज दिल्ली की वर्किंग पॉपुलेशन के अंदर टोटल वर्किंग पॉपुलेशन में केवल 11 प्रतिशत महिलाएं हैं। नेशनल लेवल 24 प्रतिशत हैं, लेकिन दिल्ल में केवल 11 प्रतिशत ही है.... 89 प्रतिशत पुरुष हैं। हम कैसे कह सकते हैं कि ये जेंडर इक्वालिटी है। दुनियाभर में देखा गया है कि जब-जब महिलाओं को मौका दिया जाता है, महिलाएं बाहर निकली हैं फैमिली इनकम बढ़ती है... डिमांड बढ़ती है... अर्थव्यवस्था बढ़ती है... ये देश के लिए ही फायदेमंद है, समाज के लिए फायदेमंद है... बराबरी का हक मिलता है। आज जब एक आम आदमी अपनी फैमिली की इनकम के लिए अगर इस कदम से उसकी फैमिली की इनकम डबल हो जाएगी तो इससे अच्छी बात क्या है।"
Author- Manisha Rajor
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