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मर्दों में कुछ ख़ास तरह के विशिष्ट गुण ही उन्हें मर्द होने का एहसास कराते हैं। इसलिए वास्तव में मर्द बनने के लिए अथवा कहलाने के लिए हर किसी को अपने भीतर उन गुणों को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। आपको बता दें कि इस क्रम में सबसे पहले आती है किसी भी इंसान की बुद्धि। बुद्धिमान होना ही असल में बलवान होना भी है। भारत सही दुनिया के कई बड़े महान विचारकों का मानना है कि जिसका पास बुद्धि होती है, बल भी उसी के पास होता है। जी हाँ, सही मायनों में देखें तो बुद्धिमान होना ही बलवान होना हो जाता है। इस बात का प्रमाण हमें हमेशा मिल जाएगा कि कोई विकल इंसान भी काफी ताक़तवर हो होता है या हो सकता है।
मर्द बनने के लिए हर इंसान को सबसे पहले उत्तम पुरुष बनना चाहिए। लेकिन कुछ लोग सिर्फ़ और सिर्फ़ पैसों के पीछे बागते रह जाते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि एक मर्द होने के लिए किसी भी इंसान में आत्म सम्मान का होना बहुत ही आवश्यक माना जाता है।
इसके बाद बारी आती है आत्मबल की। जी हाँ, किसी के शारीरिक बलवान होने से हम उसे तो महान कह सकते हैं और न ही बहुत अच्छा मर्द,क्योंकि इसके लिए तो व्यक्ति का आत्म बल बहुत मज़बूत होने की ज़रूरत होती है। वास्तव में धन और बल इन दोनों से आत्मबल अधिक बलवान और महत्वपूर्ण चीज़ है।
सतर्क रहना मर्द का एक और महत्वपूर्ण लक्षण होता है। किसी भी मर्द को किसी के ऊपर अंध विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि ब्लाइंड ट्रस्ट करके लोग पीठ पीछे खंजर मार देते हैं। मर्द वही है जो दो टूक बात करे और जल्दी किसी पर विश्वास न करे। आपको बता दें कि इन सभी बातों के लिए चाणक्य का दर्शन एक अच्छा स्रोत है, जहाँ मर्द होने के लिए ऐसे क्त लक्षण रेखांकित किये गये हैं।
Author: Amit Rajpoot
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